अधिकारी जल्द बैठक बुलाने के पक्ष में नहीं
दूसरी ओर सूत्रों ने बताया कि एमसीडी के अधिकारी अब जल्द सदन की बैठक बुलाने के पक्ष में नहीं है। उनका कहना है कि फरवरी माह में किसी तरह महापौर का चुनाव करा देेने के बाद भी हंगामे से राहत मिलनी असंभव है, क्योंकि अप्रैल माह में फिर महापौर का चुनाव होना है और उस दौरान भी इसी तरह टकराव होने की आशंका रहेगी। इस कारण लगातार टकराव होने की नौबत को टालने के लिए अप्रैल माह में ही सदन की बैठक बुलाई जानी चाहिए। इस बारे में वे उपराज्यपाल सचिवालय से व्यक्तिगत तौर पर आग्रह करेंगे। इसके अलावा अधिकारी बताएंगे कि फरवरी माह में सदन की बैठक में चुनाव होने की स्थिति में नए महापौर को दो माह का भी कार्यकाल नहीं मिलेगा। वर्ष 1997 में एमसीडी के चुनाव फरवरी माह में हुए थे, लेकिन उस दौरान तत्काल महापौर का चुनाव नहीं कराया गया था, क्योंकि महापौर को एक साल के बजाय डेढ़ माह का कार्यकाल मिल रहा था। इस कारण तब अप्रैल माह में सदन की बैठक कराई गई थी।
15 दिन से पहले नहीं हो सकती बैठक
एमसीडी की ओर से सदन की बैठक की तिथि तय कराने की पहल सोमवार को करने की स्थिति में करीब 15 दिन बाद महापौर का चुनाव हो पाएगा, क्योंकि एमसीडी सचिवालय से आयुक्त के पास फाइल जाएगी और वहां से दिल्ली सरकार के शहरी विकास विभाग में फाइल भेजी जाएगी। शहरी विकास विभाग पिछली बार की तरह फाइल का अध्ययन करने के बाद उसमें कुछ संशोधन करके उसे उपराज्यपाल सचिवालय भेजेगा। इस प्रक्रिया में एक सप्ताह लगने की संभावना है। उपराज्यपाल भी सदन की बैठक तत्काल करने के निर्देश नहीं देंगे, क्योंकि बैठक की तैयारी के संबंध में एमसीडी को एक सप्ताह की आवश्यकता चाहिए। इस कारण उपराज्यपाल भी एक सप्ताह बाद की तिथि तय करेंगे। छह जनवरी को सदन में हंगामा होने के बाद भी तत्काल की बजाय 17 दिन बाद बैठक हुई थी।