ऑडिट से पता चला है कि 37588 खाताधारकों में 1452 ऐसे हैं जिनकी जमा-पूंजी एक लाख से ऊपर की है। अब उस वक्त की बैंक जमा गारंटी (बीमा) की शर्तों के हिसाब से एक लाख तक का जमा ही लौटाया जा सकता है। इसमें से करीब डेढ़ हजार लोगों की जमा धनराशि लौटा दी गई है। अब असली संकट 1452 खाताधारकों के सामने हैं, जिनकी जमा पूंजी करीब 37 करोड़ रुपये है। अगर ब्याज सहित इस धनराशि को जोड़ा जाए तो यह करीब 50 करोड़ के आसपास बैठती है। सरकार के सामने चुनौती उसी को लौटाने की है।
नौ लोगों की संपत्ति अटैच
ऑडिट शुरू करने के साथ ही अब सरकार के निर्देश पर सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता की तरफ से बैंक संचालकों की संपत्ति अटैच करने का काम शुरू कर दिया है। अब तक नौ लोगों की संपत्ति अटैच की जा चुकी है। इसमें अशोक नगर, राजनगर और संजयनगर की संपत्तियां शामिल हैं, जिनकी कीमत करीब 15 से 20 करोड़ आंकी जा रही है।
71 लोनधारकों को भी सरकार का नोटिस
बैंक द्वारा दिए गए लोन की रिकवरी को लेकर 71 लोगों को नोटिस जारी किया गया। मामले में रिपोर्ट दर्ज होने के बाद अब सहकारिता विभाग की कोशिश बैंक से लोन हासिल करने वाले लोगों पर भी नकेल कसने की है। सभी को डिफाल्टर की श्रेणी में डालकर जल्द ही उनकी संपत्ति को अटैच किया जाना है लेकिन विभागीय अधिकारियों का कहना है कि असल दिक्कत इस बात की है कि उनकी कुल संपत्ति ही पांच-सात करोड़ रुपये के आसपास की है। हालांकि अभी विभाग की ओर से आंतरिक सर्वे जारी है।