संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। तीस हजारी कोर्ट ने पांच वर्षीय बच्चे की स्थायी कस्टडी मां को सौंपे जाने के मजिस्ट्रेट के आदेश को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि यह आदेश कानून की सीमाओं से परे है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शिवाली शर्मा ने स्पष्ट किया कि घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा 21 के तहत केवल अंतरिम अभिरक्षा ही दी जा सकती है, न कि स्थायी कस्टडी। स्थायी अभिरक्षा केवल अभिरक्षा याचिका के जरिए ही तय की जा सकती है। अदालत ने दोनों पक्षों को समझाते हुए बच्चे के हित में मुलाकात के अधिकार भी तय किए। अदालत ने कहा कि पिता रोजाना एक घंटा मां को बच्चे से वीडियो काल कराएंगे। हर रविवार गुरुग्राम के एक माल में चार घंटे के लिए मां बच्चे से मिल सकेगी। यह मुलाकात दोनों माता-पिता की उपस्थिति में होगी। कोई अन्य रिश्तेदार इस मुलाकात में शामिल नहीं होगा, जब तक दोनों पक्ष सहमत न हों।