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Delhi: एलजी ने 'आप' सरकार को दिया झटका, आपराधिक मामलों के लिए गठित स्थायी समिति को किया भंग

Tue, 28 Nov 2023 12:16 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

इस समिति में स्थायी और अतिरिक्त स्थायी वकील को जगह दी गई थी। इन्हें समिति का अध्यक्ष और सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया। उपराज्यपाल कार्यालय के मुताबिक यह साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार के निर्देशों का उल्लंघन है।
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एलजी वीके सक्सेना और सीएम अरविंद केजरीवाल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने आपराधिक मामलों में जांच की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए गठित मौजूदा स्थायी समिति को भंग कर दिया। इस समिति को आप सरकार ने गठित किया था। इस समिति में स्थायी और अतिरिक्त स्थायी वकील को जगह दी गई थी। इन्हें समिति का अध्यक्ष और सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया। उपराज्यपाल कार्यालय के मुताबिक यह साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार के निर्देशों का उल्लंघन है।

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दरअसल, सर्वोच्च न्यायालय ने सात जनवरी 2014 को गुजरात राज्य बनाम किशन भाई के मामले में एक निर्देश दिया था। इसमें कहा गया था कि प्रत्येक राज्य का गृह विभाग पुलिस और अभियोजन विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों की एक स्थायी समिति का गठन करें। इन्हें जांच करने की जिम्मेदारी सौंपी जाए। यह आपराधिक मामले में बरी करने के सभी आदेश और प्रत्येक मामले में अभियोजन की विफलता का कारण दर्ज करेगा। आप सरकार ने इस आदेश की अवहेलना करते हुए स्थायी वकील और अतिरिक्त स्थायी वकील को इसमें जगह दी। इससे टकराव की स्थिति बनी जो सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का मूल उद्देश्य पूरा नहीं करता। इसे देखते हुए एलजी ने इस समिति को भंग करते हुए अतिरिक्त मुख्य सचिव - प्रमुख सचिव (गृह) को अध्यक्ष और प्रमुख सचिव (कानून), निदेशक (अभियोजन) और विशेष पुलिस आयुक्त को सदस्य बनाकर स्थायी समिति के पुनर्गठन को मंजूरी दी।

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उपराज्यपाल ने जताई थी आपत्ति 
उपराज्यपाल का कहना है कि इससे पहले भी समय-समय पर दिल्ली उच्च न्यायालय के स्थायी वकील (आपराधिक) की अध्यक्षता वाली स्थायी समिति और अतिरिक्त स्थायी वकील को सदस्य के रूप में बनाए रखने में हितों के इस टकराव पर आपत्ति जताई थी। उनका कहना है कि इस मामले में सत्तारूढ़ व्यवस्था का ढुलमुल रवैया पुलिस और अभियोजन अधिकारियों के सेवा मामलों को नियंत्रित करने का प्रयास दिख रहा है। जबकि दिल्ली सरकार के कार्यकारी क्षेत्र में यह नहीं आता है। इस कोशिश की मदद से सरकार अप्रत्यक्ष रूप से काम करने की कोशिश कर रही होगी। 

गृहमंत्रालय ने जारी की थी सलाह 
आपराधिक मामलों में बरी होने वालों की संख्या को कम करने के लिए गृह मंत्रालय ने 24 मार्च 2014 को एक सलाह जारी की थी। इसमें जांच अधिकारियों के साथ-साथ अभियोजन अधिकारियों को अपने कर्तव्यों का निर्वहन सुनिश्चित करने के लिए कहा था। इसमें कहा गया था कि गृह विभाग मामले के विश्लेषण के लिए पुलिस और अभियोजन निदेशालय के वरिष्ठ अधिकारियों की एक स्थायी समिति का गठन करेगा। साथ ही जांच या अभियोजन, या दोनों के दौरान हुई गलतियों का पता लगाएगा। 

जांच दायरे में वकील 
एलजी कार्यालय ने कहा कि स्थायी वकील और अतिरिक्त स्थायी वकील की भूमिका भी समिति के दायरे में आती है। ऐसे में अधिकारियों को स्थायी समिति में शामिल करने को भारत के सर्वोच्च न्यायालय और गृह मंत्रालय के निर्देशों को कमजोर करने की दिशा में देखा जाना चाहिए।
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