किडनी कांड का आरोपी आगरा निवासी पुनीत प्रत्यारोपण करने वाले लोगों के फर्जी कागजात तैयार करता था। आरोपी 80 से ज्यादा लोगों के फर्जी कागजात बना चुका है। इनमें से करीब 70 की पहचान हो चुकी है जिसमें से किडनी प्राप्त करने वाले एक शख्स की मौत हो चुकी है।
पुलिस उपायुक्त अमित गोयल के अनुसार, पुनीत दिल्ली, आगरा व अन्य जगहों पर नकली कागजात खुद ही तैयार करता था। आरोपी इस तरह कागजात बनाना था कि अस्पताल प्रशासन व कमेटी के सदस्य भी फर्जीवाड़ा पकड़ नहीं पाते थे। किडनी प्रत्यारोपण में कोआर्डिनेशन, डॉक्टर व कमेटी के सदस्य होते थे। कोआर्डिनेटर का काम डोनर व प्राप्तकर्ता प्रत्यारोपण के कागजात मंगाकर एकत्रित करना होता था। अस्पताल प्रशासन फर्जी कागजात को देखकर प्रत्यारोपण की अनुमति देते थे और डाॅक्टर ऑपरेशन कर देता था।
वहीं, आरोपी चीका प्रशांत ने एमबीए की डिग्री ले रखी है। वह किडनी डोनर और प्राप्तकर्ता की प्रोफाइल एक जैसी बनाता था। गिरोह सरगना संदीप ने हेल्थ प्रबंधन की फर्जी डिग्री ले रखी है। उपायुक्त ने बताया कि अभी कागजातों का अध्ययन किया जा रहा है, उसके बाद ही जांच आगे बढ़ेगी। शुरुआती जांच में ये बात सामने आ रही है कि अस्पतालों की अभी तक कोई भूमिका नहीं है।