किडनी कांड को लेकर नित नए खुलासे हो रहे हैं। गिरोह के सदस्य इस तरह कागजात तैयार करते थे कि कोई भी भ्रम में पड़ जाए। उनके द्वारा तैयार किए गए कागज तो किडनी देने वाले के ही होते थे, मगर उस पर फोटो किडनी लेने वाले के परिवार के सदस्य की होती थी।
गिरफ्तार आरोपी
नोएडा, यूपी निवासी संदीप आर्या इस किडनी रैकेट का सरगना है और पब्लिक हेल्थ में एमबीए है। उसने फरीदाबाद, दिल्ली, गुरुग्राम, इंदौर और वडोदरा के विभिन्न अस्पतालों में ट्रांसप्लांट को-ऑर्डिनेटर के रूप में काम किया। वह मरीजों से संपर्क करता था और उन अस्पतालों में किडनी ट्रांसप्लांट की व्यवस्था करता था, जहां उसे ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर के रूप में तैनात किया गया था। वह प्रत्येक किडनी ट्रांसप्लांट के लिए करीब 35-40 लाख लेता था। जोकि मरीजों द्वारा भुगतान किया गया अस्पताल का खर्च, डोनर की व्यवस्था, आवास और सर्जरी के लिए आवश्यक अन्य कानूनी दस्तावेज शामिल होते थे। वह प्रत्येक किडनी ट्रांसप्लांट से 7 से 8 लाख बचाता था। वह पहले दिल्ली के शालीमार बाग थाना क्षेत्र में क्रेडिट कार्ड धोखाधड़ी के मामले में शामिल था।
उत्तराखंड निवासी 10 वीं पास देवेंद्र संदीप आर्य का साला है। इसने अपना खाता उपलब्ध कराया था। इस खाते में शिकायतकर्ता के पति से 7 लाख रुपये आए थे। उसका काम आरोपी संदीप आर्य की सहायता करना और उसके निर्देश पर भुगतान प्राप्त करना था। वह प्रत्येक मामले के लिए 50,000 रुपये लेता था।
लखनऊ (यूपी) निवासी विजय कुमार कश्यप उर्फ सुमित वह स्नातक है। शुरू में वह पैसे के लिए अपनी किडनी देने के लिए आरोपी संदीप आर्य के संपर्क में आया। इसके बाद, वह धोखाधड़ी में लिप्त हो गया। और संदीप आर्य के साथ काम करता था। उसे हर केस में 50,000 रुपये मिलते थे। उसका काम मरीज/रिसीवर की जीवनशैली और पारिवारिक पृष्ठभूमि के अनुसार डोनर के व्यक्तित्व को निखारना और संदीप के निर्देश पर सर्जरी से पहले डोनर की सुविधा प्रदान करना था।
आगरा (यूपी) निवासी पुनीत कुमार 2018 में अस्पताल प्रबंधन की डिग्री हासिल की और उसके बाद विभिन्न राज्यों के 7 प्रतिष्ठित अस्पतालों में नौकरी की। वह संदीप के निर्देश पर मरीज और डोनर के बीच संबंध साबित करने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार करता था। वर्तमान में वह यूपी के आगरा के एक अस्पताल में ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर के पद पर काम कर रहा था। संदीप उसे प्रत्येक फाइल के लिए 50,000 हजार से 1 लाख रुपये देता था।
मुंबई निवासी मोहम्मद हनीफ शेख पेशे से दर्जी है और घाटे के बाद, वह फेसबुक पेज के माध्यम से संदीप आर्य के संपर्क में आया और पैसे के लिए अपनी किडनी दान कर दी। इसके बाद, वह अपराध में लिप्त हो गया और संदीप आर्य के लिए काम करता था। उसका काम आरोपी संदीप आर्य को मरीज या डोनर उपलब्ध कराना था।
हैदराबाद निवासी चीका प्रशांत संदीप आर्य के माध्यम से अपनी किडनी दान की और उसके बाद वह उसके साथ जुड़ गया। संदीप ने उसे अस्पतालों में पहुँच पाने के अवसर के रूप में देखा।