भारत जितना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत का है, उतना ही मदनी का भी है। रामलीला मैदान में चल रहे जमीयत के 34वें सत्र के दौरान जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना महमूद मदनी ने यह बातें कहीं। उन्होंने दावा किया कि भारत इस्लाम की जन्मस्थली है और मुसलमानों का पहला वतन। इस्लाम सबसे पुराना मजहब है। तीन दिवसीय कार्यक्रम का समापन रविवार को होगा। रविवार को मदनी समेत दूसरे उलेमा इस्लामोफोबिया और नफरती भाषण पर अपनी राय रखेंगे।
मौलाना महमूद मदनी ने शनिवार को कहा कि अल्लाह के पहले पैगंबर का जन्म यहीं हुआ था और यह मुसलमानों का पहला वतन है। उन्होंने यह दावा भी किया कि देश में पिछले कुछ वर्षों में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की घटनाएं बढ़ी हैं और सरकार और प्रशासन को जिस तरह कार्रवाई करनी चाहिए थी, नहीं की। उन्होंने कहा, इस तरह की घटनाओं के खिलाफ हम आवाज भी उठाएंगे और लड़ाई भी लड़ेंगे। मदनी ने कहा कि अल्पसंख्यकों का आरएसएस, भाजपा या फिर बहुसंख्यकों से कोई धार्मिक या नस्ली द्वेष नहीं है। उन्होंने देश को महाशक्ति बनाने के लिए संघ प्रमुख भागवत को आपसी बैर और दुश्मनी को भुलाकर एक-दूसरे से गले मिलने का न्योता दिया।
मदनी ने कहा कि अल्पसंख्यकों का आरएसएस और भाजपा से सिर्फ विचारधारा को लेकर मतभेद है, न कि मनभेद है। हमें और उन्हें भी समझ लेना चाहिए कि यह मतभेद जिंदगी को खूबसूरत बनाता है और विरोध तंग दिली का लक्षण है। मदनी ने कहा कि इस देश की आबादी करीब 140 करोड़ है। यह लाखों वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। विभिन्न संस्कृति, भाषाएं, खान पान के तरीके और सोचने के अंदाज़ अलग-अलग होने के बावजूद यह देश जुड़ा हुआ है और एक साथ है। इसमें मुसलमानों का बड़ा किरदार है।
मदनी ने कहा कि इस धरती की खासियत यह है कि खुदा के सबसे पहले पैगम्बर अबुल बशर सैयदना आदम अलैहिस्सलाम की यह सरजमीन है। यह धरती इस्लाम की जन्मस्थली है। यह मुलसमानों का पहला वतन है। इसलिए यह कहना कि इस्लाम बाहर से आया कोई मजहब है, सरासर गलत है और ऐतिहासिक आधार पर बेबुनियाद है। उन्होंने कहा कि भारत हिंदी-मुसलमानों के लिए वतनी और दीनी (धार्मिक) दोनों लिहाज से सबसे अच्छी जगह है। मदनी ने कहा कि यह देश जितना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का है, उतना ही यह महमूद का भी है। महमूद ना तो एक इंच आगे है, ना पीछे है और वे भी महमूद से एक इंच आगे नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि सबसे ज्यादा चिंता की बात हिंदुत्व की गलत व्याख्या है और समग्र राष्ट्रवाद की हमारी पुरानी विचारधारा के बीच वैचारिक टकराव पैदा करने की आक्रामक कोशिश है। हिंदुत्व के नाम पर जिस तरह से आक्रामक सांप्रदायिकता को बढ़ावा दिया जा रहा है, वह इस देश की मिट्टी और खुशबू से मेल नहीं खाती है।
उन्होंने कहा कि हमारी आरएसएस और भाजपा से कोई धार्मिक या नस्लीय शत्रुता बिल्कुल नहीं हैं, लेकिन हमें सिर्फ विचारधारा से ऐतराज है, जो समाज के विभिन्न वर्गों के बीच बराबरी और भारतीय संविधान के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। हमारी नजर में हिंदू और मुसलमान सभी समान हैं। मदनी ने कहा कि आरएसएस के सर संघचालक के हालिया बयान ऐसे हैं जो समग्र राष्ट्रवाद की विचारधारा, राष्ट्रीय एकता और भाईचारे वाले संबंधों से कुछ मेल खाते हैं। उन्होंने कहा कि इस्लामी शिक्षाओं के मुताबिक दोस्ती के लिए बढ़ाया जाने वाला हाथ आगे बढ़कर मजबूती से थाम लिया जाना चाहिए। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघचालक मोहन भागवत और उनके अनुयायियों को आपसी भेदभाव, द्वेष और अंहकार को भूलकर एक दूसरे को गले लगाने और अपने देश को दुनिया का सबसे विकसित, आदर्श, शांतिपूर्ण और महाशक्ति बनाने के लिए आमंत्रित किया है।