विनय शर्मा बताते हैं कि इसमें वामपंथी संगठनों और छात्र संगठनों द्वारा जातिवाद मुद्दे को भी उठाया है। फिल्म में मुख्य किरदार के रूप में जेएनयू छात्रसंघ 2015 के पूर्व महासचिव व एबीवीपी नेता सौरभ शर्मा को दिखाया गया है। इसके अलावा कन्हैया कुमार से लेकर छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष व आइसा की पूर्व सदस्य शेहला राशिद को भी विभिन्न किरदारों में दिखेंगे। फिल्म में कन्हैया कुमार का किरदार किशन कुमार, शेहला राशिद का शायरा के नाम से दिखेगा।
भारत माता की जय से जय श्रीराम के नारे....
फिल्मकार का कहना है कि इसके माध्यम से दर्शकों को एक बार फिर वही भारत माता की जय, जय श्रीराम, देश की एकता, प्रभुता और अखंडता नहीं टूटने देंगे आदि नारे सुनने को मिलेंगे। इसके अलावा फीस बढ़ोतरी पर हॉस्टल में मारपीट, सबसे बड़ी हड़ताल भी दिखेगी। जेएनयू छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष व आइसा कार्यकर्ता शेहला राशिद तीन से चार साल पहले तक केंद्र सरकार की सबसे बड़ी आलोचक थी। कश्मीर के मुद्दे पर सरकार को अक्सर कटघरे में खड़ा करती थी। लेकिन अब इससे उलट प्रधानमंत्री, गृहमंत्री से लेकर सरकार के कामकाज की तारीफ करती हैं। वह अपने एक्स अकाउंट पर सरकार की जम्मू-कश्मीर में बदलाव की कोशिशों की सराहना करते हुए लिखती हैं कि मोदी है तो मुमकिन है। सकरात्मक बदलाव के कारण घाटी में युवा और लोग अब तरक्की की राह पर हैं। हालांकि, फिल्म में शेहला का नकारात्मक रूप ही दर्शकों को दिखेगा। शेहला की निगेटिव भूमिका पर निर्देशक को अफसोस भी है।