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डंकी नेटवर्क का भंडाफोड़: बेरोजगारों को बांग्लादेश-नेपाल से यूरोप भेजने का चल रहा था गोरखधंधा, नौ गिरफ्तार

Tue, 16 Jan 2024 01:24 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

आरोपियों के पास से 226 पासपोर्ट के अलावा सात लैपटॉप, 12 मोबाइल फोन और फर्जी विदेशी कागजात मिले हैं। गैंग नेताजी सुभाष प्लेस दिल्ली में चल रही फर्जी कंपनी पैराडाइज कंसल्टेंसी के जरिये वारदात को अंजाम दे रहा था। यह लोग पंजाब के नौजवानों को यूरोप भेजने झांसा देकर ठगी कर रहे थे।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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पूर्वी जिले की मयूर विहार थाना पुलिस ने डंकी नेटवर्क के जरिये बेरोजगार युवकों को विदेश भेजने वाले अंतरराष्ट्रीय गिरोह का खुलासा किया है। पुलिस ने इस संबंध में चार बांग्लादेशी नागरिकों समेत कुल नौ लोगों को गिरफ्तार किया है।

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आरोपियों के पास से 226 पासपोर्ट के अलावा सात लैपटॉप, 12 मोबाइल फोन और फर्जी विदेशी कागजात मिले हैं। पकड़े गए आरोपियों की पहचान मो. इब्राहिम, मो.मुदस्सिर खान, धीरज कुमार बिश्नोई, गौरव गुलाटी, नरेंद्र आर्य, बांग्लादेश निवासी मो. अली अकबर, मो.अनवर काजी, मो. खलीलुर रहमान और मो. यूनुस खान के रूप में हुई है। मो. अली बांग्लादेश में बैठे अपने मुखिया के आदेश पर भारत में डंकी नेटवर्क ऑपरेट कर रहा था।

गैंग नेताजी सुभाष प्लेस दिल्ली में चल रही फर्जी कंपनी पैराडाइज कंसल्टेंसी के जरिये वारदात को अंजाम दे रहा था। पकड़े गए आरोपियों में कंपनी के भी तीन लोग शामिल हैं। यह लोग पंजाब के नौजवानों को यूरोप भेजने झांसा देकर ठगी कर रहे थे। पुलिस इनसे पूछताछ कर मामले की जांच कर रही है।

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ऐसे हुआ मामले का खुलासा...
चार जनवरी को मयूर विहार थाने में तैनात इंस्पेक्टर प्रमोद, एसआई प्रशांत मलिक व अन्यों की टीम को पता चला कि पॉकेट-1 में कुछ बांग्लादेशी नागरिक अवैध रूप से रह रहा है। टीम ने छापेमारी की तो वहां पर खलीलुर रहमान, मो. अनवर काजी और इमराज हुसैन मिले। जांच के दौरान इमरान को छोड़कर किसी के पास भी वैध वीजा नहीं पाया गया। अनवर और खलीलुर रहमान के मोबाइल और कागजातों की जांच की गई तो पता चला कि यह लोग डंकी नेटवर्क गिरोह से जुड़े हैं और खुद भी डंकी रूट के जरिये यूरोप जाने का प्रयास कर रहे हैं। अनवर भारतीय आधार, पैन और नागरिकता के दूसरे दस्तावेज जुटाने के प्रयास कर रहा है।

अनवर ने यह भी बताया कि डंकी नेटवर्क भारत में अकबर उर्फ अल्ताफ चला रहा है। छानबीन के बाद टीम ने सरिता विहार इलाके में छापेमारी कर अली अकबर, यूनुस खा और इब्राहिम को दबोच लिया। इनके पास से 12 पासपोर्ट, 10 मोबाइल फोन, तीन लैपटॉप, बांग्लादेशी पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट के अलावा दूसरे विदेशी फजी दस्तावेज बरामद हुए। इब्राहिम व अनवर ने बताया कि उनका बॉस ढाका बांग्लादेश में बैठा हुआ है।

ऐसे किया जा रहा था डंकी नेटवर्क का इस्तेमाल...
बांग्लादेश में बैठा मुखिया वहां के बेरोजगारों को सपने दिखाकर उन्हें यूरोप भेजने का लालच देता था। वहां उनसे मोटी रकम वसूल कर ली जाती थी। इसके बाद भारत में बैठे अकबर और इब्राहिम को इनकी सूचना दे दी जाती थी। यहां आरोपी बेरोजगारों को भारत बुला लेते थे। इब्राहिम ने विदेशों में कई फर्जी कंपनियां खोली हुईं हैं। इसके आधार पर आरोपी वहां का वर्क परमिट लेकर वीजा दिलाने का प्रयास करते थे। यदि किसी के वीजा की अवधि समाप्त भी हो जाती थी तो आरोपी उनको भारतीय आधार और पैन दिलाकर भारत में रुकने के लिए कहते थे।

इस दौरान आरोपी धीरे-धीरे पीड़ितों से वसूली करते थे। दोनों से पूछताछ के बाद इनके तीसरे साथी मुदस्सिर को भी दबोच लिया गया। मुदस्सिर ने बताया कि वह फर्जी वर्क परमिट पैराडाइज कंसल्टेंट, नेताजी सुभाष प्लेस से लेते हैं। पुलिस ने वहां छापेमारी कर धीरज कुमार, गौरव और नरेंद्र आर्य को गिरफ्तार कर लिया।
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