अदालत ने बुधवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को आरोपी द्वारा उसके आदेशों के उल्लंघन के लिए लोक सेवक द्वारा दायर सीआरपीसी की धारा 195 के तहत शिकायत लाने को कहा। कोर्ट कांग्रेस नेता जगदीश टाइटलर के खिलाफ पूरक आरोपपत्र पर विचार कर रही है। 1984 में पुल बंगश इलाके में हुई हत्याओं के मामले में सीबीआई द्वारा एक पूरक आरोप पत्र दायर किया गया है।
राउज एवेन्यू कोर्ट स्थित अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट विधी गुप्ता आनंद ने कहा कि चूंकि सीबीआई ने धारा 188 (लोक सेवक द्वारा जारी आदेश का उल्लंघन) जोड़ा है। इसलिए सीआरपीसी की धारा 195 के तहत शिकायत दर्ज करना आवश्यक है। लोक सेवक को धारा 195 सीआरपीसी के तहत दायर शिकायत को रिकॉर्ड पर रखना होगा। अदालत ने कहा कि आरोप पत्र पर संज्ञान लेना आवश्यक है। या तो सीबीआई शिकायत लाएं या आईपीसी की धारा 188 को आरोप पत्र से हटा दें। अदालत ने सीबीआई के वकील से इस मुद्दे पर विभाग के साथ चर्चा करने और सूचित करने को कहा। मामले को 21 जुलाई को आगे की कार्यवाही के लिए सूचीबद्ध किया गया है।
न्यायाधीश ने कहा कि मैंने पूरक आरोप पत्र का अध्ययन किया है और पूरक आरोप पत्र में तीन धाराएं 153 ए, 148 और 188 आईपीसी जोड़ी गई हैं। अदालत ने कहा, धारा 153 ए के लिए मंजूरी मौजूद है। 7 जुलाई को अदालत ने जगदीश टाइटलर के खिलाफ पूरक आरोप पत्र के संज्ञान पर आदेश सुरक्षित रख लिया था। अदालत को कड़कड़डूमा कोर्ट से ट्रायल कोर्ट के रिकॉर्ड प्राप्त हुए हैं। सात फाइलें प्राप्त हुई हैं। सीबीआई के सरकारी वकील ने अदालत को जानकारी दी और कहा कि संज्ञान लेने के लिए पर्याप्त सबूत हैं और आरोपी को समन जारी किया गया है। सीबीआई अभियोजक ने कहा कि ऐसे गवाह हैं, जिन्होंने टाइटलर को दंगे में भीड़ को उकसाते हुए देखा था।