सुरंग से गुजरते हुए अब न तो ट्रेन की चाल लड़खड़ाएगी और न ही किसी तरह की दुर्घटना होने की आशंका बनेगी। ट्रेन के चालक का संपर्क स्टेशन मास्टर से भी नहीं कटेगा। इसके लिए रेलवे ने तकनीक का सहारा लेते हुए खास योजना तैयार की है। इसके लिए रेलवे एकीकृत सुरंग संचार प्रणाली विकसित करने के साथ ही सुरंग के अंदर हैंडहेल्ड रेडियो, सुरंग नियंत्रण कक्ष का बेस स्टेशन स्थापित करेगा ताकि संदेश का आदान-प्रदान होता रहे।
उत्तर रेलवे के कटरा-बनिहाल सेक्शन, मध्य रेलवे के पनवेल-कर्जत, कर्जत-लोनावाला और कसारा-इगतपुरी सेक्शन के साथ ही दक्षिण पश्चिम रेलवे के कैसल रॉक-कुलेम सेक्शन (ब्रागांजा घाट) के लिए सुरंग रेडियो संचार योजना पर काम किया जा रहा है। रेलटेल लुमडिंग डिवीजन के भैरबी-सैरांग के नई सिंगल लाइन सेक्शन में एकीकृत सुरंग संचार प्रणाली, सुरंग में आपातकालीन कॉल व्यवस्था लागू करेगा। इसपर 66.83 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। परियोजना में 32 सुरंगों को इस सिस्टम से लैस किया जाएगा। जिनकी कुल लंबाई 12643 मीटर होगी।
रेल मंत्रालय के सार्वजनिक उपक्रम रेलटेल के अधिकारियों का कहना है कि खराब सिग्नल कवरेज के कारण सुरंगों के अंदर संचार बाधित हो जाता है, जिससे ट्रेन संचालन और रखरखाव के कार्य में बाधा आ जाती है। अब अत्याधुनिक एकीकृत सुरंग संचार प्रणाली सुरंग के अंदर हैंडहेल्ड रेडियो, सुरंग नियंत्रण कक्ष के बेस स्टेशन और निकटवर्ती स्टेशनों के स्टेशन मास्टरों के बीच निर्बाध रेडियो संचार प्रदान करने के लिए तैयार की गई है। निर्माण, रखरखाव और ट्रेन संचालन में शामिल कर्मियों को हैंडहेल्ड उपकरण दिए जाएंगे। सुरंग के भीतर संचार चैनल स्वतंत्र और विफलता के बिना संचालित होगा।
सुरंग में स्पष्ट ऑडियो सुनाई देगी
सुरंग संचार परियोजना का लक्ष्य पूरी सुरंग की लंबाई के बराबर निरंतर कवरेज स्थापित करना है, जिससे बिना किसी व्यवधान के स्पष्ट ऑडियो सुनिश्चित हो सके। सिस्टम सुरंग के भीतर पर्यावरणीय परिस्थितियों में विश्वसनीय संचालन की गारंटी देगा। भैरबी-सैरांग नई लाइन परियोजना सबसे कठिन सेक्शनों में से एक है, जहां सड़क, सामग्री की अनुपलब्धता, परिवहन की उच्च लागत, दुर्गम इलाके की समस्या है। यहां स्मार्ट सुविधाओं और आपातकालीन संचार प्रणाली के लिए एकीकृत संचार प्रणाली वीएचएफ (सिंप्लेक्स) और बैकबोन नेटवर्क की डिजाइन, आपूर्ति, स्थापना, वायरिंग का परीक्षण किया जाएगा।