स्त्री रोग विशेषज्ञों की माने तो पेट के हिस्से पर जमा होने वाली चर्बी से महिलाओं को दिल का रोग हो सकता है। इसके अलावा मोटापा गर्भाशय व स्तन कैंसर के साथ पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) रोग को भी बढ़ाता है। महिला स्वस्थ वजन दिवस के अवसर पर डॉक्टरों का कहना है कि देश में महिलाओं का बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) 25 से अधिक नहीं होना चाहिए।
इस बारे में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), दिल्ली के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की प्रमुख डॉ. नीरजा भाटला ने कहा कि महिलाओं के पेट पर चर्बी बढ़ने से दिल के रोग के अलावा कैंसर की समस्याएं हो रही है। देखा जा रहा है कि महिलाओं में पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) की समस्याएं हो रही हैं। यह महिलाओं के अंडाशय (ओवरी) से जुड़ी एक गंभीर बीमारी है। देश में इससे पीड़ित महिलाओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
पीसीओएस की वजह से महिलाओं के शरीर में हार्मोन का संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे गर्भधारण में मुश्किलें आती हैं। उन्होंने कहा कि चर्बी बढ़ने से महिलाओं में गर्भाशय व स्तन कैंसर के लक्षण भी देखने को मिल रहे हैं। इससे बचने के लिए महिलाओं का बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) 25 से अधिक नहीं होना चाहिए। यदि यह ऊपर जाता है तो समस्याएं बढ़ती हैं।
पांच फीसदी में समस्या
स्त्री रोग विशेषज्ञ की माने तो एम्स, सफदरजंग, डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में उपचार करवाने आ रही महिलाओं में से करीब पांच फीसदी महिलाओं में मोटापे की समस्या मिल रही है। ग्रामीण क्षेत्रों के मुकाबले शहरी क्षेत्रों में यह समस्या ज्यादा देखने को मिल रहा है।
बीएमआई रहे 25
डॉ. भाटला के अनुसार, महिलाओं का बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) 25 रहना चाहिए। इसका आकलन उम्र, वजन और ऊंचाई के आधार पर होता है। डॉ. भाटला के अनुसार यदि यह आंकड़ा बढ़ता है तो महिलाओं में समस्याएं भी बढ़ने लगती हैं।