नई दिल्ली। आईआईटी दिल्ली के शोधकर्ताओं ने इंडिया क्लाइमेट एंड एनर्जी फ्रंटियर्स शीषर्क वाली रिपोर्ट में भारत के ऊर्जा उत्पादन में सामाजिक-आर्थिक पहलुओं की वकालत की है। इसको तैयार करने में आईआईटी, आईआईएससी सहित देशभर के 350 से अधिक शोधकर्ताओं ने योगदान दिया है। इसमें आईआईटी दिल्ली के स्कूल ऑफ पब्लिक पॉलिसी से प्रो. कावेरी इयचेट्टिरा, डॉ. द्वारकेश्वर दत्त, मेधावी संधानी और प्रो. अंबुज सागर ने इस रिपोर्ट में क्लाइमेट ट्रांजिशन पाथवे शीर्षक से अध्याय लिखा है। शोधकर्ताओं ने मौजूदा नीतिगत दृष्टिकोणों की सीमाओं को उजागर किया है। रिपोर्ट में कोयला-निर्भर क्षेत्रों पर प्रभाव, बायोफ्यूल विस्तार से खाद्य सुरक्षा पर खतरा और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं से भूमि उपयोग विवाद जैसे महत्वपूर्ण जोखिमों की भी पहचान की गई है। ब्यूरो