नई दिल्ली। द्वारका कोर्ट ने एक पति और उसके परिवार के सदस्यों को क्रूरता और यौन उत्पीड़न के आरोपों से बरी कर दिया है। कोर्ट ने आदेश में कहा कि गंभीर आरोप न्याय के बजाय बदला लेने के लिए लगाए गए थे। न्यायिक मजिस्ट्रेट श्रुति शर्मा एक महिला द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थीं जिसने दहेज की बार-बार मांग के अलावा शारीरिक, मानसिक और यौन क्रूरता का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया था। अदालत ने कहा कि ऐसा लगता है कि शिकायतकर्ता ने वास्तविक तथ्यों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया है और अपने पति के परिवार के सभी सदस्यों पर गंभीर आरोप लगाकर अपने मामले को मजबूत करने की कोशिश की है। अदालत ने कहा कि यह इस तथ्य से और पुष्ट होता है कि पति सहित परिवार के कुल सात सदस्यों को फंसाया गया था। दो पुरुष रिश्तेदार थे जिनके खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए गए थे। संवाद