दिल्ली में निर्माण कार्यों को अवैध ठहराने के लिए दाखिल याचिकाओं के जरिए ब्लैकमेलिंग पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। दिल्ली हाईकोर्ट ने ऐसी ही एक याचिका को खारिज करते हुए दक्षिणी पूर्वी जिले के डीसीपी को जांच का निर्देश दिया है।
याचिका में अमरोहा निवासी आलिम ने दिल्ली के ओखला इलाके की संपत्ति पर अवैध निर्माण की शिकायत की थी। अदालत ने डीसीपी को निर्देशित करते हुए कहा कि वह इस तरह की याचिकाओं की जांच करें, जहां एक ही संपत्ति पर अलग-अलग व्यक्तियों द्वारा याचिकाएं दायर की जा रही हैं। कोर्ट ने कहा कि यह अदालत की प्रक्रिया का दुरुपयोग है और इसे रोका जाना चाहिए।
न्यायमूर्ति मिनी पुष्कर्णा ने अपने फैसले में कहा कि मुरादाबाद के अमरोहा में रहने वाले याचिकाकर्ता आलिम का दिल्ली या संबंधित संपत्ति से कोई लेना-देना नहीं है। याचिका में जोगा बाई एक्सटेंशन, जामिया नगर ओखला स्थित संपत्ति पर अवैध निर्माण को रोकने और ध्वस्त करने की मांग की गई थी। लेकिन कोर्ट ने पाया कि इस संपत्ति पर तीसरी ऐसी याचिका है।
इससे पहले फातिमा बी और अफसाना ने भी इसी संपत्ति के खिलाफ याचिकाएं दायर की थीं, लेकिन उन्हें कभी अदालत में सूचीबद्ध नहीं कराया गया। कोर्ट ने नोट किया कि याचिकाकर्ता के हलफनामे में दिल्ली में होने का कोई प्रमाण नहीं है। संपत्ति के मालिकों के वकील ने दावा किया कि ये याचिकाएं निर्माण करने वालों से पैसे ऐंठने के लिए दायर की जा रही हैं।
एमसीडी ने की है संबंधित संपत्ति पर कार्रवाई : म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन ऑफ दिल्ली (एमसीडी) के वकील ने बताया कि संपत्ति पर अवैध निर्माण के खिलाफ 20 मई 2025 को शो-कॉज नोटिस जारी किया गया था, 13 जून 2025 को ध्वस्तीकरण आदेश पारित हुआ और 10 जुलाई 2025 को आंशिक ध्वस्तीकरण किया गया। आगे की कार्रवाई 4 सितंबर 2025 को निर्धारित है। स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने भी पुष्टि की है कि एमसीडी की कार्रवाई वेबसाइट पर अपलोड की गई है।