पीठ ने अधिकारियों को सड़कों पर भीख मांगते बच्चों को बचाने और उनके पुनर्वास के लिए पूरी दिल्ली में जोनवार उनके द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी देने के लिए आठ सप्ताह का समय देते हुए सुनवाई 2 दिसंबर तय की है।
आरोपियों को गिरफ्तार करने का निर्देश देने की मांग
याचिकाकर्ता अजय गौतम ने अधिकारियों को भिखारी बच्चों का पुनर्वास करने और बच्चों, किशोर लड़कियों और छोटे बच्चों का उपयोग करने वाली महिलाओं को भीख मांगने और अपराध में धकेलने और युवा लड़कियों का शोषण करने वाले लोगों की पहचान करने और उन्हें गिरफ्तार करने के निर्देश देने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि शहर के हर हिस्से में भिखारियों की मौजूदगी के बावजूद, अधिकारी इस खतरे को रोकने के लिए कोई सुधारात्मक कदम उठाने में विफल रहे हैं।
याचिका में कहा गया है कि हर कोई जानता है कि बच्चों द्वारा भीख मांगने के इस खतरे के पीछे भीख माफिया सक्रिय रूप से हैं और वे वास्तव में भीख मांगने के लिए मासूम बच्चों का अपहरण, प्रशिक्षण, बल और अत्याचार करते हैं।
DCPCR ने किया ये दावा
डीसीपीसीआर के वकील ने कहा कि वे समय-समय पर जांच कर रहे हैं और सड़कों पर भीख मांगते पाए गए बच्चों को बचा रहे हैं और उनका पुनर्वास कर रहे हैं।
याची ने कहा कि सर्दियों में आमतौर पर देखा गया है कि युवा लड़कियां अधिकतम सहानुभूति हासिल करने के लिए बच्चों को बिना कपड़ों के रखती हैं। कई मामलों में ये गिरोह/माफिया और युवा लड़कियां सहानुभूति बटोरने के लिए जानबूझकर छोटे बच्चों को लेकर उनकी जान जोखिम में डालते हैं।