कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन व मिनी पुष्करणा की पीठ ने कहा कि यह सच है कि भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं को कोई नियंत्रित नहीं कर सकता है, लेकिन शहर सरकार और अन्य स्थानीय अधिकारी पहले अपनी इमारतों की समीक्षा करके शुरुआत कर सकते हैं और एक कार्य योजना तैयार कर सकते हैं।
उच्च न्यायालय ने मंगलवार को यहां अधिकारियों से क्षेत्र में भूकंप के झटकों के खिलाफ उनकी स्थिरता का परीक्षण करने के लिए अस्पतालों और स्कूलों जैसी सार्वजनिक इमारतों का संरचनात्मक ऑडिट करने को कहा है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन व मिनी पुष्करणा की पीठ ने कहा कि यह सच है कि भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं को कोई नियंत्रित नहीं कर सकता है, लेकिन शहर सरकार और अन्य स्थानीय अधिकारी पहले अपनी इमारतों की समीक्षा करके शुरुआत कर सकते हैं और एक कार्य योजना तैयार कर सकते हैं।
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अदालत ने आदेश दिया कि दिल्ली सरकार और अन्य स्थानीय एजेंसियों को सभी अस्पतालों, स्कूलों और कॉलेजों का संरचनात्मक ऑडिट करने और स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया जाता है। अदालत वकील अर्पित भार्गव की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिसमें दावा किया गया था कि दिल्ली में इमारतों की भूकंपीय स्थिरता खराब है और बड़े भूकंप की स्थिति में बड़ी संख्या में लोग हताहत हो सकते हैं। दिल्ली सरकार के वकील संतोष कुमार त्रिपाठी ने कहा कि कार्रवाई की जा रही है। किसी भी बड़े झटके से निपटने के लिए शहर की सभी इमारतों को भूकंपरोधी बनाने का काम चरणबद्ध तरीके से ही किया जा सकता है।
सरकारी वकील ने इस बात पर जोर दिया कि शहर में कई पुरानी इमारतें होने के अलावा, अनधिकृत निर्माणों की भी समस्या है, जिनमें से कुछ को ध्वस्त कर दिया गया है। यह कहते हुए कि सरकार उन अधिकृत निर्माणों पर भी आंखें मूंद लेती है जो ताश के पत्तों की तरह गिर सकते है। पीठ ने कहा कि वहां रहने वालों को उचित चेतावनी जारी की जानी चाहिए। इन लोगों को चेतावनी दें, नोटिस लगाएं कि संरचना खतरनाक और असुरक्षित है।
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दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के वकील ने कहा कि वह अनधिकृत निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है और इमारतों को सुरक्षा मानदंडों के अनुरूप बनाने के लिए उनमें रेट्रोफिटिंग के विकल्प पर भी विचार किया जा रहा है। ताकि आम लोगों के जीवन पर प्राकृतिक आपदा के चलते आने वाले खतरे और नुकसान को कम किया जा सके।
दिल्ली दंगा : सुरक्षाकर्मियों पर हमले के दो आरोपी बरी
अदालत ने दंगा करने, ईंटें फेंकने और सुरक्षाकर्मियों पर तेजाब फेंकने जैसे विभिन्न आरोपों में लिप्त दो आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। अदालत ने कहा, आरोपियों के खिलाफ कोई सबूत नहीं है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पुलस्त्य प्रमाचला ने आरोपी असरफ अली और परवेज को बरी करते हुए यह फैसला सुनाया। आरोपियों पर उस दंगाई भीड़ का हिस्सा होने का आरोप था, जिसने शिव विहार इलाके में दंगों के दौरान छतों से कांच की बोतलों, एसिड और ईंटों से सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) बटालियन पर हमला किया था। अभियोजन पक्ष ने कहा कि हमले में एसएसबी के दो जवान घायल हो गए। एकमात्र प्रत्यक्षदर्शी की गवाही पर गौर करते हुए न्यायाधीश ने कहा कि उसने पास के स्कूल में तेजाब फेंके जाने के बारे में कुछ नहीं कहा। उन्होंने उस विशेष भीड़ के बारे में भी नहीं बताया जिसने अपराध किया था।