एसीपी की शिकायत पर दर्ज है मामला, अदालत ने कहा- पुलिस का पक्ष सुने बिना आदेश नहीं दे सकते
नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान जातिसूचक टिप्पणी और सार्वजनिक रूप से अपमानित करने के आरोप में महिला पत्रकार के खिलाफ दर्ज मामले की जांच पर रोक लगाने से दिल्ली हाईकोर्ट ने फिलहाल इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि पुलिस का पक्ष सुने बिना कोई आदेश नहीं दिया जा सकता। न्यायमूर्ति मिनी पुष्कर्णा ने समय की कमी के चलते मामले की सुनवाई दशहरा अवकाश के बाद 27 अक्टूबर को तय की है। महिला पत्रकार ने जिले के कनॉट प्लेस उपमंडल में तैनात सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) विवेक भगत की शिकायत पर दर्ज प्राथमिकी की जांच रोकने की मांग की थी। महिला पत्रकार ने एसीपी विवेक भगत की शिकायत पर दर्ज प्राथमिकी की जांच रोकने की मांग की थी। उनके वकील ने दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट ने 15 अक्तूबर को पत्रकार के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया था। वहीं, दिल्ली पुलिस का आरोप है कि तीन अक्तूबर को ड्यूटी के दौरान एसीपी के खिलाफ जातिसूचक टिप्पणी की गई और सरकारी कामकाज में बाधा पहुंचाई गई। मामले में एससी-एसटी कानून समेत विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज है। पत्रकार की ओर से एसीपी के खिलाफ दी गई यौन उत्पीड़न की शिकायत की जांच अपराध शाखा कर रही है। संवाद