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Delhi NCR News: जैश के आतंकी को शादी के लिए पैरोल देने से हाईकोर्ट का इन्कार

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20 साल से अधिक समय से जेल में है दोषी, जम्मू कश्मीर जाने के लिए मांग रहा था राहत
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वीडियो कॉल से अभिभावकों से बात कराने के निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादी को जम्मू-कश्मीर जाने के लिए पैरोल देने से इनकार कर दिया। वह 20 साल से अधिक समय से जेल में है और जम्मू-कश्मीर जाने के लिए राहत की मांग कर रहा था। अदालत ने कहा, ऐसी आशंका है कि क्षेत्र में उसकी उपस्थिति व्यापक सुरक्षा हित के लिए हानिकारक होगी।
दोषी ने अपने माता-पिता से मिलने और शादी करने के लिए पैरोल की मांग की थी। हालांकि अदालत ने जेल अधीक्षक को आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सदस्य फिरोज अहमद भट्ट के लिए अपने माता-पिता के साथ बातचीत के लिए एक बार वीडियो कॉल की व्यवस्था करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा इससे कुछ हद तक एक बेटे के रूप में उन्हें सांत्वना मिल सकती है कि वह अपने माता-पिता को देख सकते हैं और उनसे बात कर सकते हैं, भले ही वर्चुअली ही सही। अदालत ने कहा, मामले के सह-अभियुक्तों में से एक ने पैरोल पर रिहा होने के बाद फिर से एक आतंकवादी संगठन ज्वाइन कर लिया था। हालांकि, बाद में एक मुठभेड़ में वह निष्प्रभावी हो गया।
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ये ऐसे कारक हैं जो याचिकाकर्ता के पैरोल के लिए आवेदन के रास्ते में आएंगे। अदालत ने कहा ऐसे में पैरोल देने के लिए यह उपयुक्त मामला नहीं है। बताते चलें कि भट्ट को 2003 में एक आतंकवादी मामले में गिरफ्तार किया गया था और आतंकवाद निरोधक अधिनियम, भारतीय दंड संहिता और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत अपराधों के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। उनके वकील ने कहा कि 44 वर्ष के भट्ट 20 वर्ष से न्यायिक हिरासत में है और शादी करना चाहता है। इस वजह से उसे पैरोल पर रिहा किया जाए।
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