उच्च न्यायालय ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की पत्नी सुनीता केजरीवाल को निचली अदालत की ओर से जारी समन पर सोमवार को रोक लगा दी। उन्हें दो अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूचियों में नामांकन के आरोप में समन जारी किया गया था। न्यायमूर्ति अमित बंसल ने सुनवाई एक फरवरी तय करते हुए समन पर रोक लगा दी थी।
सुनीता की और से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता रेबेका जॉन ने तर्क दिया कि आरपी अधिनियम के तहत अपराध केवल तभी स्थापित होता है जब कोई व्यक्ति झूठी घोषणा प्रस्तुत करता है। इस मामले में उन्होंने तर्क दिया कि भाजपा नेता हरीश खुराना ने झूठी घोषणा प्रस्तुत करने को साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं दिया।
अदालत ने 2019 में दिल्ली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता हरीश खुराना द्वारा दायर एक मामले में सुनीता को समन जारी किया था। उन्होंने आरोप लगाया गया था कि वह दिल्ली में साहिबाबाद (गाजियाबाद निर्वाचन क्षेत्र) और चांदनी चौक की मतदाता सूची में एक मतदाता के रूप में पंजीकृत थीं। जो आरपी एक्ट की धारा 17 का उल्लंघन है।