-5,594 बुजुर्गों पर किया अध्ययन, शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में दिखे सकारात्मक बदलाव
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए) के एक अध्ययन में फरीदाबाद के बुजुर्गों के स्वास्थ्य में सुधार के सकारात्मक संकेत मिले हैं। संस्थान की ओर से चलाए गए सामुदायिक आयुर्वेद कार्यक्रम के तहत बुजुर्गों को आयुर्वेदिक औषधियां दी गईं। इसके बाद उनकी जीवन गुणवत्ता, पाचन क्षमता और हड्डियों की मजबूती में सुधार दर्ज किया गया। मानसिक स्वास्थ्य के आकलन में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिले। संस्थान की जन-स्वास्थ्य पहल के तहत तीन महीने में 60 से 80 वर्ष की आयु के 5,594 बुजुर्गों की जांच की गई। वहीं, डिमेंशिया पर केंद्रित कार्यक्रम में चार महीने के दौरान 200 मरीजों की जांच कर उन्हें आयुर्वेद आधारित औषधियां दी गईं। अध्ययन के शुरुआती आकलन में पता चला कि 67.73 प्रतिशत बुजुर्गों को आंखों से जुड़ी समस्याएं थीं, जबकि 43.05 प्रतिशत लोग शारीरिक रूप से कम सक्रिय थे। इसके अलावा, 6.85 प्रतिशत बुजुर्गों में याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता में कमी पाई गई। कई लोगों में उच्च रक्तचाप, बढ़ा हुआ ब्लड शुगर, हड्डियों की कमजोरी, कब्ज और नींद से जुड़ी समस्याएं भी सामने आईं। परियोजना के पहले चरण में 60 दिनों तक किए गए उपचार के बाद बुजुर्गों की जीवन गुणवत्ता में सुधार दर्ज किया गया। वहीं, दूसरे चरण में मानसिक क्षमता की जांच करने वाले परीक्षणों में भी सकारात्मक बदलाव मिले। इसके साथ ही सेरोटोनिन, एसिटाइलकोलीन, डीएचईए और विटामिन डी जैसे जैविक संकेतकों के स्तर में भी सुधार पाया गया। इन नतीजों को 24 अक्तूबर को अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान में आयोजित कार्यशाला में प्रस्तुत किया गया।