दिल्ली सचिवालय में खुद को गोली मारने वाले सोहनवीर ने सुसाइड नोट में लिखा है कि वह पिछले करीब 11 वर्षों से दिल्ली पुलिस की सेवा कर रहा है। लेकिन इतना
सब कुछ होने के बाद भी उसके विभाग ने उसकी एक नहीं सुनी। हवलदार सोहनवीर को करीब 8 घंटे खजूरी खास थाने में बैठाकर रखा गया और बिना कार्रवाई घर भेज
दिया गया। जबकि आरोपी पक्ष को कुछ ही देर बाद घर भेज दिया गया था। सोहनवीर के भतीजे उत्तम ने आरोप लगाया कि अपने ही विभाग की बेवफाई से हताश होकर
उसके चाचा ने खुदकुशी जैसा कदम उठाया है। उत्तर-पूर्वी जिला पुलिस उपायुक्त पूरे मामले की जांच कराने की बात कह रहे हैं।
उत्तम ने बताया कि काफी समय पूर्व माता-पिता की मौत के बाद उसके पिता मांगेराम ने चाचा सोहनवीर को बेटे की तरह पाला था। बाद में वह दिल्ली पुलिस में भर्ती
होकर खजूरी खास में रहने लगा। उसकी चाची सोहन की बिल्कुल भी नहीं सुनती थी। बृहस्पतिवार को सोहनवीर का ससुर चमन और यूपी पुलिस की वर्दी में पहुंचा उसका
ममेरा साला यशपाल व पांच-छह अन्य लोगों ने उसके चाचा को बुरी तरह पीटा। सोहनवीर ने इसकी पीसीआर कॉल की तो पुलिस दोनों पक्षों को थाने ले गई। पहुंच की
वजह से ससुर चमन व उसके परिवार को फौरन छोड़ दिया गया।
वहीं, सोहनवीर को कार्रवाई करने की बात कहकर रात करीब 9 बजे तक थाने में बैठाए रखा गया। इससे सोहन अपने ही विभाग की कार्यशैली से बुरी तरह टूट गया। घर
पहुंचकर वह चुपचाप अपनी ड्यूटी पर चला गया। इसके बाद उसने अपने दोस्त विकास के नाम एक व्हाट्स ऐप मेसेज लिखा। उसमें अपनी बुलेट बाइक के बारे में लिखा।
बाइक को भतीजे को देने की बात लिखी। वहीं, दोस्त जयसिंह, सुमित, अनुज, गौरव से माफी की बात लिखी। उसने बड़े भाई मांगेराम से भी सेवा न कर पाने के लिए
माफी मांगी। सोहन के कदम से उसका पूरा परिवार बेहद दुखी है।