-साहित्य अकादमी में 120वीं जयंती पर व्याख्यानमाला, गल्प में कल्प-सृष्टि पर चर्चा
ज्योति सिंह
नई दिल्ली। आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी से अपनी पहली मुलाकात का ऐसा ही भावुक संस्मरण साझा करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. विश्वनाथ त्रिपाठी शनिवार को साहित्य अकादमी में भावुक हो उठे। आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी की 120वीं जयंती के अवसर पर आयोजित व्याख्यानमाला में विश्वनाथ त्रिपाठी ने कहा कि एमए में प्रथम श्रेणी नहीं आई थी और वह इससे बेहद परेशान हो गए थे। इसी परेशानी में वह बनारस पहुंचे और किसी तरह आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी से मिलने का अवसर मिला। मैंने उनका चरणस्पर्श किया और कहा आप तो साहित्य के सूर्य हैं, कुछ हो जाए… मैं आपकी शरण में आया हूं। उन्होंने मेरी बात सुनी और कहा ‘जिंदगी किसी के बनाने से नहीं बनती, खुद बनानी पड़ती है। और तुम्हें क्या पता, मेरे अंदर कितने दोष हैं। फिर उन्होंने पूछा, कैसा रिजल्ट था तुम्हारा..। मैंने उन्हें बताया तो वे बोले, चलो ठीक है, सब ठीक हो जाएगा। अब तो तुम मेरे विद्यार्थी हो गए। मैं उनके पैर छूकर वापस जाने लगा तो उन्होंने मुझे रोक लिया और पूछा, तुमने कुछ खाया..। मुझे आज भी वह बात याद है। मैंने सोचा कि इस आदमी की मेरे लिए पहली चिंता यह है कि मैंने कुछ खाया है या भूखा हूं। यही उनका व्यक्तित्व था। वह केवल पढ़ाने वाले गुरु नहीं थे, बल्कि बाह पकड़कर समझाने वाले व्यक्ति थे। इस दौरान प्रो. अनिल राय और प्रो. नीरज कुमार भी मौजूद रहे।