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नूंह हिंसा : अवैध के साथ वैध हथियारों से भी की गई थी फायरिंग

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नूंह हिंसा: अवैध के साथ वैध हथियारों से भी की गई थी फायरिंग
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- एसआईटी की प्रारंभिक जांच में सामने आ रही बात
- जांच पूरी होने पर कई शस्त्र लाइसेंस किए जाएंगे रद्द


संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। बीते सोमवार को नूंह के नल्हड़ मंदिर से शुरू हुई जलाभिषेक यात्रा पर हुए पथराव और फायरिंग का सच अब सामने आने लगा है। मंदिर को घेरकर फायरिंग किए जाने के मामले में गठित एसआईटी टीम को प्रारंभिक जांच में पता चला है कि मंदिर में पनाह लेने वाले श्रद्धालुओं पर वैध और अवैध दोनों प्रकार के असलहों से फायरिंग की गई थी। हालांकि पुलिस इस मामले में अभी कुछ बोलने को तैयार नहीं है, लेकिन माना जा रहा है कि एसआईटी जांच पूरी होने के बाद कई लोगों के शस्त्र लाइसेंस रद्द किए जा सकते हैं।
नूंह हिंसा के दौरान सबसे ज्यादा संवेदनशील नल्हड़ मंदिर का प्रकरण रहा था। यहां 500 से ज्यादा श्रद्धालुओं को उप्रदवियों ने चारों ओर से घेरकर एक प्रकार से बंधक बना लिया था। इनमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी थीं। उपद्रवी मंदिर के आसपास ही अरावली की पहाड़ी पर छिपे हुए थे। जैसे ही कोई श्रद्धालु मंदिर से बाहर निकलने की कोशिश करता था, वैसे ही उप्रदवी फायरिंग तेज कर देते थे।
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हालात इस कदर खराब थे कि मंदिर से श्रद्धालुओं को बाहर निकालने के लिए प्रदेश सरकार को अतिरिक्त पुलिस बल भेजना पड़ा था। पुलिसकर्मियों ने भी घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद श्रद्धालुओं को वहां से सुरक्षित निकाला था। इस मामले में प्रदेश स्तर पर अपर पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था ममता सिंह की काफी प्रशंसा भी की गई थी। नूंह दंगों की जांच के लिए प्रदेश सरकार द्वारा गठित की गई आठ एसआईटी टीम में से एक टीम को सिर्फ इस बात की जांच सौंपी गई है हिंसा के दौरान उपद्रवियों ने किस प्रकार के हथियार का प्रयोग किया।
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पुलिस सूत्रों की माने तो एसआईटी ने अपनी जांच में यह पाया है कि इस हिंसा में बड़ी संख्या में लाइसेंसी शस्त्रों का भी प्रयोग किया गया था। हालांकि यह भी माना जा रहा है कि यह लाइसेंस हथियार जिले के अलावा गैर जनपद और राजस्थान सीमा से सटे जिलों के भी हो सकते हैं।
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