संवाद न्यूज एजेंसी
तावडू। 31 जुलाई को शोभायात्रा के दौरान हुई सांप्रदायिक हिंसा से मुस्लिम प्रवासी मजदूर वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। हरियाणा में बड़ी संख्या में पश्चिम बंगाल, आसाम और बिहार के मजदूर काम करते हैं जो जिनमें ज्यादातर अब पलायन कर चुके हैं। हिंसा के बाद नूंह जिले में बंगाली मजदूरों की क्या स्थिति है? शुक्रवार को पश्चिम बंगाल सरकार के निर्देश पर पश्चिम बंगाल प्रवासी श्रमिक कल्याण बोर्ड अध्यक्ष एवं टीएमसी सांसद समीरुल इस्लाम जिले के तावडू और नूंह शहर में पहुंचे थे।
पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि नूंह हिंसा के बाद हरियाणा के अलग-अलग क्षेत्र में काम करने पहुंचे पश्चिम बंगाल के मजदूर बड़ी संख्या में पलायन कर गए हैं जो चिंता का विषय है। वह पश्चिम बंगाल मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निर्देश पर पूरे हरियाणा प्रदेश में पश्चिम बंगाल प्रवासी मजदूरों की स्थिति का जायजा लेने पहुंचे हैं। उन्हें जानकारी मिली कि हिंसा के बाद बेहद डरे हुए बंगाली मजदूर तावडू और नूंह से पलायन कर गए हैं। मजदूरों के पलायन को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार का प्रशासन हरियाणा सरकार के प्रशासन से सीधे संपर्क में है। उन्होंने कहा कि नूंह में 31 जुलाई को शोभायात्रा के दौरान हुई सांप्रदायिक हिंसा एक बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी। मेवात का भाईचारा देश के लिए मिसाल रहा है।मेवातियों का इतिहास उन्होंने पढ़ा है। देश विभाजन के दौरान महात्मा गांधी ने मेवात में पहुंचकर मेवातियों से रुकने का आह्वान किया था। गांधीजी के एक आह्वान पर मेवाती भारतीय होकर रह गए। उन्होंने कहा हिंसा से सबसे ज्यादा गरीब और मजदूर वर्ग प्रभावित होता है। नूंह हिंसा के बाद भी ऐसा ही हुआ। नूंह के आसपास और खास तौर पर गुरुग्राम में काम करने वाले बंगाली प्रवासी मजदूरों को सीधे तौर पर निशाना बनाया गया।जहां से बड़ी संख्या में उत्तर भारत में मजदूर आते हैं। देश के एकमात्र राज्य पश्चिम बंगाल में प्रवासी मजदूर बोर्ड का गठन किया हुआ है। नूंह के आसपास प्रवासियों मजदूरों के सामने आने वाली चुनौतियां गंभीर हैं। पश्चिम बंगाल सरकार हरियाणा सरकार के साथ तालमेल कर मजदूरों की चुनौतियों का समाधान करने के लिए प्रतिबद्ध है।