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Gurugram News: ऑटो पार्ट्स से भरे तीन ट्रक 11 घंटे में ट्रेन से पहुंचे गुजरात

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ऑटो पार्ट्स से भरे तीन ट्रक 11 घंटे में ट्रेन से पहुंचे गुजरात
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वेस्टर्न कॉरिडोर के माध्यम से विंसम लॉजिस्टिक के साथ मिलकर मारुति ने शुरू किया ट्रायल
कार्बन उत्सर्जन की दिशा में बड़ा कदम, समय के साथ ही बचेंगे कई प्रकार के अनावश्यक खर्चें

संजय शिशौदिया
गुरुग्राम। कार्बन उत्सर्जन को कम करने की दिशा में हरियाणा की सबसे बड़ी मारुति सुजूकी कंपनी ने अपना एक कदम और बढ़ाया है। लॉजिस्टिक क्षेत्र की कंपनी विंसम के साथ मिलकर मारुति ने ऑटो पार्ट्स से भरे तीन ट्रकों को गुजरात भेजने के लिए पहली बार रेलवे के वेस्टर्न कॉरिडोर का प्रयोग किया। कंपनी ने अपने ऑटो पार्ट्स से भरे ट्रकों को रेल सेवा के माध्यम से गुजरात भेजने का ट्रॉयल शुरू कर दिया है।
तीन दिन पहले मारुति के इन तीन ट्रकों को मालगाड़ी पर चढ़ाकर गुजराज के पालनपुर तक भेजा। मात्र 11 घंटों में ही अपने गंतव्य पर पहुंचे इन ट्रकों ने मालगाड़ी से उतरकर मेहसाणा स्थित सुजुकी कंपनी तक का सफर तय किया। पालनपुर से मेहसाणा तक का सफर मात्र एक घंटे का है।अब सोमवार को भी मारुति कंपनी अपने पांच ट्रकों की दूसरी खेप इसी वेस्टर्न रेल कॉरिडोर के माध्यम से भेजने जा रही है। ट्रायल के तौर पर मारुति कंपनी द्वारा आगामी तीन माह तक इसी प्रकार पार्ट्स भेजने की बात कही जा रही है।
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गुरुग्राम के मानेसर में मारुति कंपनी का सबसे बड़ा कारखाना स्थित है। इस कारखाने से गुजरात के मेहसाणा स्थित कारखाने में कंपनी अपने ऑटो पार्ट्स ट्रकों के माध्यम से भेजती रही है। मालगाड़ी के माध्यम से 700 किलोमीटर की इस दूरी को तय करने में इन ट्रकों को आधा ही समय लगा। जहां ट्रक अगले दिन पालनपुर पहुंचते थे, वहीं पहले ही ट्रायल में यह ट्रक मात्र 11 घंटे में अपने गंतव्य पर पहुंच गए। लॉजिस्टिक क्षेत्र की कंपनी विंसम ने ट्रक ऑन ट्रेन के इस प्रयोग को आने वाले समय के लिए बेहद ही महत्वपूर्ण बताया है।

डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर ट्रक ऑन ट्रेन द्वारा ऑटो पार्ट्स का परिवहन ऐतिहासिक कदम
विंसम लॉजिस्टिक, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर काउंसिल ऑफ इंडिया (डीएफसीसीआईएल) और मारुति कंपनी के वरिष्ठ नेतृत्व ने इस परियोजना का शुभारंभ किया। पार्ट्स की यह पहली खेप न्यू रेवाड़ी स्टेशन से रवाना की गई। मौजूद अधिकारियों का कहना था कि इस सेवा के शुरू होने से आने वाले वर्षों में कार्बन-मुक्त परिवहन के क्षेत्र में वृद्धि होगी। उन्होंने इसे एक ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि '''' ट्रक ऑन ट्रेन '''' कॉन्सेप्ट का उद्देश्य यातायात को सड़कों की बजाय रेलवे के द्वारा पूरा करके टायरों से होने वाले कार्बन को कम करना है। यह कदम देश भर के उद्योगों के लिए एक ग्रीन लॉजिस्टिक्स ईको-सिस्टम का काम करेगा।
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'''' ट्रक ऑन ट्रेन '''' के लिए डिजाइन किया गया है न्यू रेवाड़ी स्टेशन
न्यू रेवाड़ी स्टेशन विशेष रूप से '''' ट्रक ऑन ट्रेन '''' सेवा के लिए ही डिजाइन कराया गया है। यहां गाड़ियों को ट्रेन पर चढ़ाने के लिए रैंप बने हुए हैं। इसके अलावा भारतीय रेलवे की डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कंपनी इंडिया लिमिटेड द्वारा ट्रांसपोर्टेशन के लिए ट्रकों को ट्रेनों में लोड करना शामिल है। इस स्टेशन से सिर्फ मालगाड़ियों का ही संचालन होता है। फिलहाल इस ट्रैक पर एक मालगाड़ी का अप एंड डाउन संचालन होता है। यह मालगाड़ी प्रतिदिन विभिन्न कंपनियों के तीस कंटेनर लेकर रवाना होती है। हालांकि इस स्टेशन पर प्रत्येक तीन घंटे में एक ट्रेन और एक दिन में 250 ट्रक भेजने की क्षमता है।


कंपनी ने हरित परिवहन की नीति अपनाई है। मारुति कार अपने बेड़े की करीब 20 फीसदी कारों को रेलवे के माध्यम से ही परिवहन करती है। इसी दिशा में अब ऑटो पार्ट्स से भरे ट्रकों को भी रेलवे के माध्यम से ही भेजना शुरू कर दिया गया है। बीते दिनों तीन ट्रकों में भरी पार्ट्स की पहली खेप गुजरात भेजी गई। अब सोमवार को दूसरी खेप भेजने की तैयारी की जा रही है। फिलहाल ट्रायल चल रहा है। प्रयोग सफल रहा तो इस संख्या को बढ़ा दिया जाएगा। - एसडी छाबड़ा, कार्यकारी अधिकारी, मारुति सुजुकी
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यह व्यवस्था ड्राइवरों के लिए एक वरदान साबित होगी। उनके निजी जीवन, सुरक्षा आदि पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। ज्यादा लोकेशन पर लोडिंग अनलोडिंग से छुटकारा मिलेगा। इससे समय और खर्च की बचत के साथ-साथ माल के टूटने का खतरा भी कम होगा। ईंधन की बचत के साथ ही ग्राहकों को सुरक्षित और समय पर डिलीवरी मिलेगी। राजमार्ग पर चलने के दौरान लगने वाले टोल टैक्स की बचत होगी। - अमित शर्मा, निदेशक, विंसम
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