गबन के आरोप में निगम के तीन जेई और दो ठेकेदार कंपनियों पर केस
गुरुग्राम। 2012-13 में बादशाहपुर में कराए गए विकास कार्यों में घटिया निर्माण सामग्री का प्रयोग कर करोड़ों गबन करने के आरोप में मुख्यमंत्री उड़न दस्ते की शिकायत पर निगम के तीन जेई व दो ठेकेदार कंपनियों के खिलाफ धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज कराया गया है। पुलिस ओर से जांच शुरू कर दी गई है। निगमायुक्त ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तीनों को निलंबित करने की तैयारी शुरू कर दी हैं। पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक, 2012-13 में तत्कालीन राज्य सरकार की ओर से बादशाहपुर क्षेत्र में वार्ड स्तर पर सड़क, सीवर, पानी, बरसाती पानी की निकासी व अन्य विकास कार्यों के लिए 40-40 करोड़ की राशि मंजूर की थी। इनका ठेका ई टेंडरिंग प्रक्रिया के माध्यम से मैसर्स शिव प्रोबिल्ड लिमिटेड कंपनी को 35.54 करोड़ में आवंटित किया गया था। निगम ने कंपनी को 6 करोड़ रुपये का भुगतान भी कर दिया था। ठेकेदार कंपनी की ओर से एग्रीमेंट की शर्ताें का उल्लंघन करते हुए काम बीच में छोड़ दिया गया। इस पर निगम ने ठेकेदार कंपनी पर 3.54 करोड़ का जुर्माना लगा दिया। 13 अगस्त 2014 को तत्कालीन जेई देवेंद्र कुमार, प्रवीण राघव व संजय शर्मा की देखरेख में मैसर्स जेंडर्स इंजीनियर्स प्राइवेट लिमिटेड को रिस्क एंड कॉस्ट फैक्टर के आधार पर 37.20 करोड़ का काम आवंटित कर दिया। आरोप है कि निगम अधिकारियों ने मिलीभगत करते हुए ठेके में नए काम भी जोड़ते हुए खर्च बढ़ा दिया। ठेके में गबन की शिकायत पर 27 जून 2016 को मधुबन स्थित जांच लैब व दिल्ली टेस्ट हाउस में अलग-अलग सैंपल की जांच करा हरियाणा पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन से रिपोर्ट बनवाई गई। पुलिस के मुताबिक, सामग्रियों के नमूने फेल होने के बाद निगम अधिकारियों और दोनों कंपनियों के खिलाफ मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई करने की सिफारिश की गई थी। इसकी डीसीपी दक्षिण की ओर से फाइल की जांच चल रही थी। इस मामले में 31 अक्तूबर को मुख्यमंत्री उड़नदस्ते के निरीक्षक कृष्ण कुमार की शिकायत पर बादशाहपुर थाना पुलिस ने निगम के तीनों जेई और दोनों ठेकेदार कंपनियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया। बादशाहपुर थाना प्रभारी क मुताबिक मामला दर्ज कर लिया गया है जिसकी जांच की जा रही है।