जिस प्लाट पर बताई गई कंपनी उसका किराया नामा था फर्जी, आर्थिक अपराध शाखा की जांच के बाद मामला दर्ज
सीए की भूमिका भी संदिग्ध, कंपनी के माध्यम से किया गया मनी लॉन्डि्रंग का खेल
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। उद्योग विहार के एक प्लाट का फर्जी करार नामा बनाकर चीन के नागरिकों को कंपनी का निदेशक बनाकर अलग-अलग तीन कंपनियों का रजिस्ट्रेशन करने का मामला सामने आया है। इन कंपनियों के माध्यम से पैसे का लेन-देन कर मनी लांडि्रंग की गई है। भारत सरकार की ओर से कंपनी रजिस्ट्रेशन की जांच के बाद उद्योग विहार थाना पुलिस ने अलग-अलग तीन मामले दर्ज किए हैं।
पुलिस को यह शिकायत रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज दिल्ली हरियाणा के अधिकारी आलोक पांडे ने दी है। जांच के दौरान जिस प्लाट नंबर पर यह कंपनी रजिस्टर्ड है। वहां पर कुछ नहीं पाया गया है। आरोपियों की ओर से जो किराये का करार नामा जमा किया गया था। वह सब फर्जी पाए गए हैं। कंपनी के रिकार्ड में उद्योग विहार फेज-4 के पते पर कैरेफिन टेक्नालाॅजी प्राइवेट लिमिटेड रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज में रजिस्टर्ड बताई गई है। फर्जीवाड़े समेत अन्य आरोपी इस कंपनी, दिल्ली ताजपुर निवासी मनीष कुमार, बिहार औरंगाबाद निवासी मोहित कुमार, यूगेन ताशी, त्सूल्तरिम दमदुल, अमित कुमार आदि इस कंपनी के दिसंबर 2020 से लेकर फरवरी 2021 तक निदेशक बने।
आरोप है कि चार्टर्ड एकाउंटेंट रौनल कुमार ने इस कंपनी की गलत जानकारी संबंधित विभाग को दी। दूसरी शैल कंपनी स्ट्राउड प्राइवेट लिमिटेड बताई गई है। इसमें निदेशक सोनम व संगीता देवी दिखाई गई हैं। सीएस रजनी कोहली की ओर से इसकी फर्जी डिटेल पोर्टल पर देने का आरोप है। तीसरी शैल कंपनी ओनियन नाइट टेक्नालाॅजी प्राइवेट लिमिटेड बताई गई है। इसमें चीनी नागरिक जियानहुआ डोंग, मिंग लाओ, निदेशक अश्विनी पर फर्जी कंपनी बनाने का आरोप है।
इस शैल कंपनी के निर्माण व संचालन में सीएस रजनी कोहली के भी शामिल होने का आरोप लगाया गया है। उद्योग विहार थाना में तीन अलग-अलग एफआईआर दर्ज की है। डीसीपी वेस्ट करण गोयल के अनुसार आर्थिक अपराध शाखा की ओर से शिकायत की जांच के बाद अलग-अलग धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।