विकसित देशों की तर्ज पर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से सीधा घरों तक पहुंचेगा पानी
- इटली में जलापूर्ति के इस सिस्टम को बनाने वाली कंपनी के साथ निगम ने तैयार की योजना
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। कम प्रेशर में पानी आना, पानी के इंतजार में रात- रात भर जागना.. पानी को लेकर ऐसा मानसिक दबाव आने वाले दिनों में गुरुग्रााम के लोगों को नहीं झेलना होगा। विकसित देशों की तर्ज पर आने वाले दिनों में गुरुग्राम के घरों के नलों में 24 घंटे पानी उपलब्ध होगा। इटली में जलापूर्ति का यह सिस्टम बनाने वाली कंपनी के सहयोग से नगर निगम पानी की निर्बाध आपूर्ति करने की कवायद शुरू कर चुका है।
निगम के 24 गुणा सात प्रोजेक्ट रिपोर्ट के अनुसार सुरक्षित, विश्वसनीय और वहनीय उपाय लेकर आ रहा है। इसके अनुसार सुबह शाम जलापूर्ति के बजाए पाइप में 24 घंटे पानी पूरे प्रेशर के साथ उपलब्ध होगा। स्टोरेज की जरूरत नहीं होगी। इससे कई किस्म की बचत होगी। बताया गया है कि पूणे और बंगलुरू में भी इस तरह की पेयजल आपूर्ति व्यवस्था है।
जीएमडीए ने की थी शुरुआत
इस योजना की डीपीआर निगम ने तैयार की है। हालांकि इस योजना पर काम कई साल पहले शुरू हुआ था। दो साल पहले जीएमडीए के सीईओ सुधीर राजपाल ने इसे पानी की योजना में शुमार किया था। अब इसे कार्यान्वित करने के लिए नगर निगम ने कवायद शुरू कर दी है। पुरानी योजना के अनुसार पहले चरण में सेक्टर 15 पार्ट -1, पार्ट -2, सेक्टर 14, बसई , सेक्टर 4, सेक्टर 7, सेक्टर 9 और सेक्टर 9 ए में इसे शुरू करने की तैयारी की गई थी। इसमें करीब 140 से 175 करोड़ रुपये खर्च होने थे। अब गुरुग्राम के मध्य का एक बड़ा हिस्सा चिन्हित किया गया है। सभी इलाकों में सर्वे और योजना के बाद निगम इसे तैयारी के साथ लागू करेगा।
पानी की आपूर्ति का लेखा-जोखा किया गया तैयार
पिछले साल सितंबर के महीने में गुरुग्राम के बसई और चंदू बुढ़ेरा दोनों प्लांट से छह मुख्य पाइप लाइनों से आपूर्ति किए जाने वाले पानी का एक डाटा तैयार किया गया। जिसमें हर रोज दोनों वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की पाइप लाइनों से कितने पानी की आपूर्ति की गई, इसे दर्ज किया गया। बसई वाटर ट्रीटमेंट के तीन मुख्य पाइप लाइन हैं, इसमें 400, 1200 और 1300 एमएम की लाइन और चंदू बुढ़ेरा से आने वाली 900 एमएम और 1600 एमएम की पाइप लाइन से पानी की आपूर्ति का पूरे महीने लेखा जोखा तैयार किया गया है। इससे यह पता चल सकता है किन जगहों 24 घंटे निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए और बूस्टिंग स्टेशन की जरूरत पड़ेगी। इसके लिए एक सर्वे किया गया, जिसमें निगम क्षेत्र में कितने पानी के कनेक्शन है, किस पेयजल की क्या स्थिति है, किन पाइप लाइनों को बदले जाने की जरूरत है। ये सारी जानकारियां ली गई है।
मुख्य बिंदु
- निगम इसके लिए आईक्यूटी इन प्राइवेट लिमिटेड और रुबिक इंफ्राटेक कंपनी की सहायता लेगा, आईक्यूटी इटली आधारित कंपनी है
- करीब 500 करोड़ रुपये की यह परियोजना है
- वाटर मीटर की सहायता से तय किया जाएगा, पानी का प्रेशर
- बिजली की खपत होगी कम, यूजी और ओवर हैड टैंक की जरूरत होगी कम
- पूरे प्रेशर के साथ पानी की आपूर्ति डिस्ट्रिक्ट मीटरिंग से पानी की निर्बाध आपूर्ति होगी
- बगैर शुल्क चुकाए पानी लिए जाने वालों को चिन्हित किया जा सकेगा।
- पानी की आपूर्ति को सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डाटा एक्जिविशन सिस्टम स्काडा के माध्यम से कंट्रोल किया जाएगा
- कंट्रोल रूम आधारित स्काडा मॉनिटरिंग से बगैर शुल्क चुकाए पानी के कनेक्शन का पता चल सकेगा, कही पानी की आपूर्ति बाधित हुई तो तत्काल उसे ठीक किया जा सकेगा
पानी की कमी को पूरा करना होगा
- फिलहाल चंदू बुढ़ेरा और बसई के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से गुरुग्राम की करीब 30 लाख आबादी के लिए 570 एमएलडी (मिलियन लीटर पर डे) पानी की आपूर्ति होती है। पानी की कमी को पूरा करने के लिए करीब 450 टयूबवेल का भी सहारा लिया जाता है। शहर को फिलहाल करीब 650 एमएलडी पानी की जरूरत है।
शहर में 2.10 लाख पानी के कनेक्शन हैं। जिसे आने वाले दिनों 3.80 लाख होने का अनुमान है। इस योजना की सफलता के लिए नगर निगम को पानी की जरूरत और पानी की आपूर्ति के बीच के अंतर को कम करना होगा ।
वर्जन
यह बड़ी और महत्वाकांक्षी परियोजना है। इसे पांच चरणों में पूरा किया जाना है। पहले चरण के लिए डीपीआर तैयार की गई है। इसके लिए नई लाइनें बिछाए जाने और कुछ बूस्टिंग स्टेशन बनाए जाने की भी जरूरत होगी। इस योजना के लागू होने से शहर की जलापूर्ति का तरीका बिलकुल बदल जाएगा। - विशाल गर्ग, कार्यकारी अभियंता