अप्रैल का पहला सप्ताह बीतने के बाद भी नगर निगम के बजट पर नहीं लग पा रही सरकार की मुहर
15 दिन पहले ही आय-खर्च का अनुमानित बजट सरकार को भेज चुका है निगम का वित्त विभाग
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। नगर निगम के बजट का इंतजार धीरे-धीरे से लंबा होता जा रहा है। ऐसे में शहर के विकास की रफ्तार मंद पड़ने लगी है। नए वित्त वर्ष में शहर के विकास की योजनाएं तैयार होनी चाहिए थी, वह नहीं हो पा रही है।
यह दीगर है कि निगम के वित्त विभाग ने 15 दिन पहले ही बजट का खाका तैयार कर सरकार को मंजूरी के लिए भेज दिया था, लेकिन उसे अभी तक मंजूरी नहीं मिल पाई है। बीते 29 मार्च को वित्त विभाग के अधिकारी चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री की बैठक में भी इसी उम्मीद से शामिल हुए कि शायद बैठक में इस पर चर्चा होगी, लेकिन पूरी तैयारियों के साथ पहुंचे अधिकारियों को खाली हाथ ही लौटना पड़ा।
अब पूरे आठ दिन बीतने के बाद भी बजट शासकीय सचिवालय की किसी टेबल पर पड़ा मंजूरी का इंतजार कर रहा है। वित्त विभाग ने नए वित्त वर्ष के लिए कुल 4300 करोड़ रुपये के बजट का अनुमान लगाया है। इसके आय और व्यय दोनों के अनुमान में 700-700 करोड़ रुपये की कटौती की गई है। विभिन्न मदों में आय के लिए करीब 2300 करोड़ रुपये का अनुमान प्रस्तावित है। जबकि खर्च का अनुमान 2000 करोड़ रुपये तय किया गया है। वित्त वर्ष 2022-23 में निगम की ओर से 5700 करोड़ रुपये का बजट पेश किया गया था। इसमें 3000 करोड़ रुपये की आय तथा 2700 करोड़ रुपये का खर्च का अनुमान लगाया गया था।
900 करोड़ रुपये से होंगे काम
नगर निगम ने अपने बजट में शहर की विभिन्न विकास परियोजनाओं पर 900 करोड़ रुपये खर्च करने का अनुमान लगाया है। इस राशि से कम्यूनिटी सेंटर, सड़क और आमजन के लिए अन्य सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। पिछली बार की तरह की सेनिटेशन और हेल्थ पर इस बार भी 500 करोड़ रुपये की राशि खर्च होने का अनुमान है। पिछली बार सेनिटेशन और हेल्थ पर 565 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। 150 करोड़ सड़क, सीवर, ड्रेनेज, फुटपाथ और अन्य परियोजनाओं के रखरखाव और मरम्मत पर खर्च करने का अनुमान है। वित्त वर्ष चालू होने के बाद भी शहर के विकास की योजना नहीं बनाई जा रही है। मानसून से पहले निगम को सड़कें दुरुस्त करनी है, ड्रेनेज का निर्माण करना है, पानी की पाइप लाइन बदलनी है, विभिन्न कॉलोनियों और सेक्टरों में जन सुविधाएं मुहैया करानी है। बजट को मंजूरी नहीं मिलने के कारण तमाम परियोजनाएं लटक गई है।
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संपत्ति की फजीहत के कारण घटाया आय का अनुमान
पिछले वर्ष विभिन्न मद में 1100 करोड़ रुपये के संपत्ति कर की वसूली का अनुमान लगाया था। इसके मुकाबले एक साल में महज 174 करोड़ रुपये की वसूले जा सके। वित्त विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार ब्याज और सरचार्ज में समय-समय पर सरकार की ओर से माफी योजनाएं दी जाती है। बड़ी संख्या में डिफाल्टर संपत्ति कर जमा नहीं करा रहे। इसलिए संपत्ति कर से आय के अनुमान को घटाया गया है। इस बार संपत्ति कर से 275 करोड़ रुपये की आय का ही अनुमान लगाया गया है। सबसे अधिक आय स्टांप ड्यूटी से करीब 600 करोड़ का अनुमान है। 200 करोड़ रुपये म्यूनिसिपल बांड से आने की उम्मीद है। जमीन की बिक्री, लीज और संपत्ति को किराए पर देकर निगम 100 करोड़ की आय का अनुमान लगा रहा है। करीब साढ़े 450 करोड़ रुपये विभिन्न मद से आय का अनुमान है।
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बजट को सरकार की मंजूरी के बिना पेश नहीं किया जा सकता है। सरकार की मंजूरी का इंतजार है, जल्द ही मंजूरी के बाद बजट पेश कर दिया जाएगा। - विजय सिंगला, मुख्य लेखा अधिकारी, नगर निगम