फर्रुखनगर। चांदनगर रोड स्थित जलघर के शिवालय में चल रही श्रीराम कथा के पांचवें दिन कथावाचक आचार्य त्रिलोकी महाराज ने भगवान श्रीराम की बाल लीलाओं का सुंदर वर्णन किया। कथा व्यास ने कहा कि पूजा में भाव की महत्ता होती है। प्रभु भक्त के भाव को देखते हैं। यदि हम राम को पाना चाहते हैं तो वे हमें अनुराग से प्राप्त होंगे। प्रभु की छवि को ही मन में बसाना होगा। आचार्य त्रिलोकी महाराज ने बताया कि श्रीराम की बाल लीला संसार की सबसे सकारात्मक और आनंदमयी लीला है। इस अवसर पर अजीत सैनी आढती, नरेश सैनी, नन्हे आदि सहित बड़ी संख्या में मौजूद रहे। संवाद