डेढ़ सौ करोड़ से हटाया जाएगा बंधवाड़ी से कूडे़ का पहाड़
- मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद निजी क्षेत्र की तीन कंपनियों को सौंपा गया काम
- बंधवाड़ी में कचरा प्रबंधन को लेकर एनजीटी अधिकारियों को लगा चुका है फटकार
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। बंधवाड़ी में कचरे के पहाड़ का निस्तारण करने में शिथिलता बरतने पर एनजीटी की फटकार के बाद अब प्रशासन ने इस दिशा में तेजी से काम करना शुरू कर दिया है। बृहस्पतिवार को इस संबंध में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने चंडीगढ़ में बैठक के दौरान तीन टेंडरों को अनुमति दी है। निगम द्वारा बंधवाड़ी में कूड़े के पहाड़ों को समाप्त करने के लिए तीन निजी एजेंसियों को 15 लाख टन कचरा निस्तारण का काम सौंपा गया है। इस कार्य के लिए 150 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
बीते करीब आठ माह से नगर निगम के अधिकारी 15 लाख टन कचरे के निस्तारण को लेकर टेंडर प्रक्रिया में ही उलझे हुए थे। टेंडर प्रक्रिया सिरे नहीं चढ़ने के कारण निगम अधिकारियों की कार्य प्रणाली पर सवाल उठ रहे थे। निगमायुक्त पीसी मीणा ने इन टेंडरों को लगाने का कार्य नगर निगम के कार्यकारी अभियंता विकास मलिक को सौंपा था। इसके बाद नए सिरे से इसकी टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई।
बीते बृहस्पतिवार को चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री मनोहर लाल के साथ हुई बैठक में निगम अधिकारियों ने बंधवाड़ी में लगे कूड़े के पहाड़ों के टेंडरों की फाइल रखी तो मुख्यमंत्री ने टेंडरों में कमी निकालते हुए दोबारा से टेंडर करने के आदेश दे दिए। इसके बाद निगम अधिकारियों को शाम को फिर से मुख्यमंत्री के साथ बैठक के लिए बुलाया गया, जिसमें मुख्यमंत्री ने तीनों टेंडरों को अनुमति दे दी।
नगर निगम गुरुग्राम के कार्यकारी अभियंता विकास मलिक ने बताया कि बंधवाड़ी में कचरा निस्तारण को लेकर मुख्यमंत्री ने 15 लाख टन कचरे के निस्तारण को लेकर तीनों टेंडरों को अनुमति दी है। जल्द ही बंधवाड़ी में एजेंसियों से कचरा निस्तारण का काम शुरू करवाया जाएगा।
एनजीटी की सख्ती से हरकत में आए अधिकारी:
बंधवाड़ी में कूड़े के पहाड़ को लेकर एनजीटी ने सख्त रवैया अपनाया हुआ है। कचरे के इसी पहाड़ को लेकर एनजीटी नगर निगम पर 100 करोड़ का जुर्माना भी लगा चुका है। बीते दिनों इसी मामले में फरीदाबाद और गुरुग्राम के नगर आयुक्तों को भी व्यक्तिगत रूप से एनजीटी के समक्ष पेश होना पड़ा था। इसमें भी एनजीटी ने अधिकारियों को फिर से जुर्माना लगाने की चेतावनी दी थी। इस मामले की सुनवाई के लिए एनजीटी ने अब 9 जनवरी की तारीख नियत कर रखी है। इस तारीख पर शहरी स्थानीय निकाय विभाग के सचिव एवं आयुक्त को पेश होने के आदेश जारी किए हुए हैं।