विरोध में आए निवासी, कहा-गुमराह करना चाहता है बिल्डर
असुरक्षित घोषित किए गए दो टावरों में 10 लोगों ने फ्लैट नहीं किए खाली
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। सेक्टर-109 स्थित चिंटेल्स पैराडाइसो सोसाइटी के टावरों की बिल्डर द्वारा निजी तौर पर सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीबीआरआई) से गुणवत्ता जांच कराए जाने के विरोध में निवासी उतर आए हैं। उनकी दलील है कि जब प्रशासन ने विशेषज्ञों और आईआईटी जैसी संस्थाओं से ऑडिट का काम करवा लिया है और रिपोर्ट दी है उसके बाद बिल्डर फिर से जांच करवा कर गुमराह करना चाहता है। इसके साथ ही रहने के लिए असुरक्षित की गई ई और एफ टावरों के 10 फ्लैट मालिकों ने फ्लैट खाली करने से भी इनकार कर दिया है।
10 फरवरी 2022 को चिंटेल्स सोसाइटी की डी टावर में हुए हादसे में दो महिलाओं की मौत हो गई थी। प्रशासन ने जांच समिति गठित की थी, जिसने रिपोर्ट दी कि हादसा ग्रस्त डी टावर को पूरी तरह ध्वस्त किया जाए। इसके साथ ही दो अन्य टावर ई और एफ को भी रहने के लिए असुरक्षित घोषित कर दिया था। बिल्डर ने टावर बचने की संभावना दिमाग में रखते हुए सीबीआरआई से भी टावरों की जांच करवाना शुरू कर दिया जिसका निवासी विरोध कर रहे हैं।
यहां के निवासियों की मांग है कि टावरों का फिर से निर्माण करवाया जाए। घर के बदले घर चाहिए। सोसाइटी की रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) के अध्यक्ष राकेश हुड्डा कहते हैं कि असुरक्षित घोषित किए गए टावरों को फिर से बनाए जाने की मांग को लेकर प्रतिनिधिमंडल चंडीगढ़ में निदेशक टाउन एंड कंट्री प्लानिंग से मिला था। इसमें सभी टॉवरों के प्रशासन द्वारा किए जा रहे ऑडिट में देरी सहित निवासियों की परेशानी और बिल्डर की लापरवाही के बारे में बताया गया था। असुरक्षित घोषित की गई ई और एफ टावर में 10 परिवार ऐसे हैं जिन्होंने फ्लैट खाली करने से इनकार कर दिया है। इनका कहना है कि सीबीआरआई से बिल्डर गुणवत्ता की जांच करवा रहा है। टावर खाली करके लोग बेघर हो रहे हैं। कहीं से कोई मदद नहीं मिल रही है।