एंटी करप्शन ब्यूरो को छह माह पहले एक गुमनाम शिकायत मिली थी। इसमें तहसीलदार दर्पण कांबोज पर करीब 40 लाख रुपये रिश्वत लिए जाने का आरोप लगाया गया था। रिश्वत की यह मोटी रकम तहसीलदार ने दौलताबाद में अवैध रूप से काटी जा रही कॉलोनी के प्लाटों की रजिस्ट्री के नाम पर प्रॉपर्टी डीलर से ली थी। उस समय आरोपी हरसरू तहसील में तैनात था। बीते साल दिसंबर में मिली इस गुमनाम शिकायत के बाद इसी साल जनवरी में एंटी करप्शन ब्यूरो ने यह मामला दर्ज किया था।
बृहस्पतिवार शाम करीब चार बजे ब्यूरो की एक टीम गुरुग्राम तहसील पहुंची और आरोपी तहसीलदार दर्पण को हिरासत में ले लिया। टीम उसे लेकर मुख्यालय पहुंची और पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। ब्यूरो के अधिकारी अभी इस मामले में कुछ खुलकर नहीं बता रहे हैं। उनका कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है।
एंटी करप्शन ब्यूरो की ओर से चलाए जा रहे अभियान के तहत भ्रष्टाचारियों पर शिकंजा कसा जा रहा है। ब्यूरो की ओर से भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाले अधिकारियों पर मामला दर्ज कार्रवाई की जा रही है। हुडा में गलत तरीके से प्लाट आवंटन का मामला अभी थमा ही नहीं था कि अब तहसील में पैसे लेकर अवैध कॉलोनी के प्लाट की रजिस्ट्री करने का खेल उजागर हुआ है। छानबीन के दौरान पता चला है कि आरोपी तहसीलदार के पास गुरुग्राम के साथ ही मानेसर तहसील का भी अतिरिक्त कार्यभार था। जिस समय की यह रिश्वतकांड बताया जाता है, उस समय वह हरसरू तहसील में तैनात था।
एंटी करप्शन ब्यूरो को छानबीन के दौरान पता चला कि तहसीलदार ने गांव दौलताबाद की औद्योगिक भूमि की जगह कृषि योग्य भूमि का विवरण अंकित करते हुए जनवरी 2022 में वसीका तैयार कर दिया। जिसके लिए उन्होंने एक बड़ी रकम जमीन के मालिक से ली। जिससे सरकार को 2 करोड़ 27 लाख 93 हजार 92 रुपये की वित्तिय हानि हुई। इस प्रकरण में एसीबी द्वारा जांच की गई और जांच पूरी करने के बाद टीम ने कंबोज को अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया था। इस दौरान हुई पूछताछ में उन पर लगाए गए आरोप साबित हो गए। जिसके बाद प्राथमिकी दर्ज करने के बाद तहसीलदार और उस भूमि के मालिक दौलताबाद निवासी हरीश को गिरफ्तार किया है। मामले में और कितने लोगों की भूमिका थी, इस बारे में जानकारी हासिल करने के लिए उन्हें रिमांड पर लिया जाएगा।
कैसे होती थी अवैध रजिस्ट्री
दौलताबाद में काटी जा रही अवैध कॉलोनी के खेल में दलाल से लेकर विभाग के अन्य कर्मचारी की भी मिली भगत की संभावना है। ऑनलाइन रजिस्ट्री के दौरान गलत नंबर डालकर रजिस्ट्री का टोकन निकाला जाता था। जिन प्लाटों की रजिस्ट्री तहसीलदार की तरफ से हुई है उसमें जिला योजनाकार की एनओसी का गलत नंबर डाला जाता था।