- मुख्यमंत्री ने किसानों से की फलों, सब्जियों, फूलों की खेती अपनाने की अपील
- कहा, डीबीटी के माध्यम से किसानों के खाते में 50 हजार करोड़ रुपये डाले गए
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। भावांतर भरपाई योजना के लाभार्थियों के साथ संवाद के दौरान मनोहर लाल ने कहा कि छोटी होती भूमि जोत को लाभकारी बनाने का एक ही तरीका है कि किसान बागवानी की ओर अग्रसर हों और फलों, सब्जियों और फूलों की खेती को अपनाएं। हमारा लक्ष्य वर्ष 2030 तक बागवानी के अधीन क्षेत्र को दोगुना करके 22 लाख एकड़ करने और उत्पादन को तीन गुना करने का है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों के खाते में डीबीटी के माध्यम से लगभग 50 हजार करोड़ रुपये डाले हैं। अब किसान अपनी फसल बेच कर आता है तो पैसा सीधा उसके खाते में पहुंचता है। उन्होंने कहा कि किसान फसल तो पैदा कर लेता है, लेकिन उसके सामने बाजार भावों की अनिश्चितता बनी रहती थी और कई बार तो कम कीमत पर फसल बेचने को मजबूर होते थे। किसानों की इस समस्या को हमने समझा और तय किया है कि फसल बोने से पहले ही किसानों को यह पता चल जाए कि फसल का कम से कम एक सुनिश्चित मूल्य तो मिलेगा ही।
इसके लिए राज्य सरकार ने फल व सब्जियों के लिए जनवरी, 2018 से तथा बाजरे के लिए खरीफ-2021 से भावांतर भरपाई योजना शुरू की । इसके तहत यदि बाजरे का भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे चला जाता है तो न्यूनतम समर्थन मूल्य और बाजार भाव के अंतर की राशि सरकार द्वारा किसानों को दी जाती है और यह राशि सीधे उनके खातों में डाली जाती है।
प्रदेश में मोटे अनाजों के उत्पादन को दे रहे बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन किसानों से बात हो रही है, उनमें बाजरा पैदा करने वाले किसान भी हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ ने वर्ष 2023 को अंतरराष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष घोषित किया है। मोटे अनाज सेहत के लिए अच्छे हैं, इसलिए आज सेहत के लिए जागरूक लोगों में इनका सेवन करने का रुझान बढ़ा है और इनकी मांग न केवल देश में बल्कि विदेशों में भी बढ़ी है। हम हरियाणा में भी मोटे अनाजों के उत्पादन को बढ़ावा दे रहे हैं और किसान को भी इनके लाभकारी मूल्य सुनिश्चित किये हैं।
दो सीजन में बाजरे की पैदावार करने वालों को दिए 830 करोड़ रुपये
मुख्यमंत्री ने कहा कि भावांतर की भरपाई बाजरे की प्रति एकड़ औसत उत्पादकता के आधार पर की गई है। यदि किसान अच्छे भाव मिलने के इंतजार में अपनी उपज मंडी में नहीं लाया तो भी, यदि उसने अपने उपयोग के लिए बाजरा रख लिया तो भी उसे भावांतर का भुगतान किया जाता है। उन्होंने बताया कि खरीफ सीजन-2021 में बाजरे का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,250 रुपये प्रति क्विंटल था और औसत बाजार भाव 1650 रुपये प्रति क्विंटल था। हमने 600 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भावांतर भरपाई की। खरीफ-2021 में 2,42, 948 किसानों के खातों में 440 करोड़ रुपये की राशि भावांतर भरपाई के रूप में सीधी डाली गई।
उन्होंने कहा कि खरीफ-2022 में बाजरे का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,350 रुपये प्रति क्विंटल था और औसत बाजार भाव 1900 रुपये प्रति क्विंटल था। हमने 450 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भावांतर भरपाई की। खरीफ-2022 में 2,76, 620 किसानों के खातों में 390 करोड़ रुपये की राशि भावांतर भरपाई के रूप में सीधी डाली गई। इस प्रकार दो सीजन में बाजरे की पैदावार करने वाले किसानों के खाते में 830 करोड़ रुपये सीधे ही डाले गए।
मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को मौसम के कारण भी फसलों में भारी नुकसान उठाना पड़ता है, इसलिए सरकार ने मौसम की अनिश्चितताओं के जोखिम से किसानों को मुक्त करने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना व मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना शुरू की है। इसमें बागवानी की 21 फसलें शामिल हैं। इसमें सब्जियों के लिए 75 हजार रुपये और फलों के लिए 1 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर क्लेम राशि दी जा रही है।
इस वर्ष 70 हजार नए सोलर ट्यूबवैल
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने पिछले साल प्रदेश में लगभग 53 हजार सोलर पंप लगाए और इनके लिए किसानों को सब्सिडी दी गई। इस वर्ष भी 70 हजार नए सोलर ट्यूबवेल लगाए जाएंगे। इससे बिजली की खपत में भी कमी आएगी और किसान को भी बहुत बड़ा फायदा होगा।