कुल पांच सत्र में ड्राफ्टिंग कमेटी के सदस्य वार्ता के लिए मिले
जी-20 शेरपा अमिताभ कांत ने की अध्यक्षता
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। आगामी जी-20 शिखर सम्मेलन के लिए नेताओं की घोषणा को अंतिम रूप देने के लिए मानेसर के नजदीक तावडू में विचार-विमर्श का दौर दूसरे दिन भी जारी रहा। इस दौरान कुल पांच सत्र में ड्राफ्टिंग कमेटी के सदस्य वार्ता के लिए मिले। इसकी अध्यक्षता जी-20 शेरपा अमिताभ कांत ने की।
चौथी और अंतिम शेरपा बैठक का दौर सात सितंबर तक जारी रहेगा। बैठक में जी-20 के सदस्य और आमंत्रित देशों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय संगठन भी विचार सत्रों में शामिल हुए। सात सितंबर तक जारी रहने वाली ड्राफ्टिंग कमेटी की बैठकों में भारत के नेतृत्व में आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन के जरिये भारत दुनिया में ग्लोबल साउथ की आवाज का प्रतिनिधित्व कर रहा है। ऐसे में ड्राफ्टिंग नोट नेताओं की घोषणा सभी के लिए एक निष्पक्ष और अधिक टिकाऊ दुनिया की वकालत करेगा।
औपचारिक बैठकों के अलावा शेरपाओं को ''''सोफा टॉक'''' की अनौपचारिक सेटिंग में गहरे संबंधों को बढ़ावा देने का मौका मिला। स्पष्ट बातचीत कूटनीति, विश्वास निर्माण और सहयोग के लिए इस बैठक का सहारा लिया गया। इससे प्रतिनिधियों को व्यक्तिगत स्तर पर जुड़ने में मदद मिली। इससे राष्ट्रों के बीच समझ और सहयोग के बंधन मजबूत होंगे। इस बार भारत की अध्यक्षता में अफ्रीकी संघ की स्थायी सदस्यता सभी जी-20 देशों की ओर से समर्थित एक समर्पित महिला कार्य समूह और नागरिकों की जनभागीदारी की वकालत करेगा। ड्राफ्ट के जरिये संघीय, सामाजिक, कूटनीतिक, वैश्विक, आर्थिक जैसे सभी स्तरों पर भागीदारी को बढ़ावा देने के साथ-साथ सभी के लिए एक बेहतर दुनिया का जनघोष दिखाई देगा।
इसके अलावा मंगलवार को आईटीसी ग्रांड भारत के शांत लॉन में आयोजित सूर्योदय योग सत्र के साथ भारतीय संस्कृति के जरिये संबंधों को बढ़ावा देने में मदद मिली। बैठक सत्र की शुरुआत से पहले ''''वीविंग इंडिया टुगेदर'''' थीम के तहत विदेशी गणमान्य व्यक्ति सांस्कृतिक पहलुओं में डूबे। इसमें तीज महोत्सव, पनिहारी मंत्र, खोरिया नृत्य और रसिया नृत्य जैसे पारंपरिक हरियाणवी लोक नृत्यों की मंत्रमुग्ध कर देने वाली विशेषताएं बताईं। इस दौरान प्रसिद्ध कोरियोग्राफर संतोष नायर ने भी प्रदर्शन किया। इसमें सूफी और समकालीन प्रदर्शनों के साथ-साथ राजस्थान, मणिपुर और उत्तर प्रदेश जैसे क्षेत्रों के शास्त्रीय, पारंपरिक और लोक भारतीय नृत्य रूपों का मिश्रण प्रदर्शित किया गया।