नई शिक्षा नीति के तहत संस्थान की भोगौलिक स्थिति की भी जानकारी देनी होगी
कॉलेजों में जल्द लागू होगी ग्रेड प्रणाली, छात्र संख्या से वर्गीकरण की तैयारी
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर अब कॉलेजों की रैंकिंग और सुविधाएं तय की जाएगी। इसके लिए जिले के दो कॉलेजों के प्राचार्य भी विशेष कमेटी में अपना योगदान देंगे। निदेशालय ने तय किया है कि एक हजार, एक से दो हजार और दो हजार से अधिक विद्यार्थियों वाले कॉलेज चिन्हित करने होंगे।
नई शिक्षा नीति (एनईपी-2020) के आधार पर मौजूदा शैक्षणिक सत्र में दाखिला लेने वाले छात्रों की संख्या के अलावा संस्थान की भोगौलिक स्थिति की भी जानकारी देनी होगी। इससे क्षेत्र विशेष में छात्रों की रूचि और जरूरत के अनुसार कोर्स विकसित करने के सभी विकल्पों पर भी ध्यान दिया जाएगा। इसके साथ ही निर्धारित कमेटी ढांचागत विकास को लिए भी संस्तुति दे सकेंगे। इसके साथ ही ई लर्निंग के भी सभी विकल्पों को ध्यान में रखा जाएगा। नए दौर के विषय व कोर्स भी लागू करने पर ध्यान दिया जाएगा। इसके अलाव नजदीकी निजी कॉलेजों में पढ़ाए जाने वाले कोर्स व विषय भी सरकारी कॉलेज में लागू करने की ओर ध्यान दिया जाएगा।
ग्रेड के साथ तय होगी कोर्स संख्या व कॉलेज स्तर
1.ए ग्रेड में ऐसे कॉलेजों को शामिल किया जाएगा जहां छात्र संख्या एक हजार से कम हो। ऐसे संस्थानों में मानविकी और वाणिज्य केवल दो संकाय पढ़ाए जा सकेंगे। साथ ही तीन प्रेक्टिकल कोर्स पढ़ाने की अनुमति मिलेगी। साथ ही ऐसे कॉलेजों का स्तर स्नातक डिग्री कॉलेज तक सीमित रखा जाएगा। इन संस्थानों के लिए तीन कंप्यूटर लैब होगी। प्रत्येक में 25 कंप्यूटर होंगे।
2. ए प्लस ग्रेड में ऐसे कॉलेज शामिल किए जाएंगे जहां विद्यार्थी संख्या एक से दो हजार के बीच होगी। ऐसे संस्थानों में मानविकी, वाणिज्य और विज्ञान तीन संकाय पढ़ाए जाएंगे। इसके अलावा एनईपी के तहत क्रेडिट कोर्स सिस्टम भी ऐसे कॉलेज में लागू होंगे। इसमें छात्रों को मल्टीपल एंट्री और एग्जिट का विकल्प मिलेगा। ऐसे संस्थानों में चार कंप्यूटर लैब अनिवार्य होंगी। प्रत्येक लैब में 30 कंप्यूटर होंगे। साथ ही पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स भी करने का मौका यहां छात्रों को मिलेगा।
3. ए प्लस प्लस ग्रेड में ऐसे कॉलेज शामिल किए जाएंगे जहां विद्यार्थी संख्या दो हजार से अधिक होगी। ऐसे संस्थानों में मानविकी, वाणिज्य और विज्ञान तीन संकाय पढ़ाए जाएंगे। साथ ही वोकेशनल कोर्स करने का विकल्प छात्रों को मिलेगा। अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय स्तर का एक्सपोजर देने के लिए इस स्तर के संस्थानों के साथ कॉलेज टाइ-अप सुनिश्चित किए जाएंगे। ऐसे संस्थानों में छह कंप्यूटर लैब अनिवार्य होंगी। प्रत्येक लैब में 30 कंप्यूटर होंगे। यूजी-पीजी कोर्स के अलावा स्वयं पोषित व स्वयं रोजगार विकसित करने के उद्देश्य से छात्रों को इन्क्यूबेशन सेंटर की सुविधा मुहैया कराई जाएगी।
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आगामी एक माह में देनी होगी रिपोर्ट
छात्रों की संख्या के अनुसार 22 जिलों के सभी सरकारी कॉलेजों का वर्गीकरण कमिशन को करना होगा। इसके लिए एक माह का समय दिया गया है। अगली बैठक के समय विवरण के साथ पूरी रिपोर्ट देनी होगी। इसके लिए 19 दिसंबर का समय तय किया गया है।