औद्योगिक संगठनों की मांग, एक साल बाद लगाया जाए प्रतिबंध
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। एक अक्तूबर से डीजल से चलने वाले जनरेटरों पर रोक लगाए जाने से उन सोसाइटियों में असमंजस की स्थिति है जहां पर अभी भी पूरी तरह बिजली की आपूर्ति विभाग के द्वारा नहीं है। इसके अलावा औद्योगिक संगठनों ने भी मांग की है कि इस प्रतिबंध लगाने को एक वर्ष आगे बढ़ाया जाए जिससे उद्योगों को गैस की पाइप लाइनों की आपूर्ति की व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके। जबकि राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि एक अक्तूबर से प्रतिबंध को लागू करने की पूरी तैयारी है। चिकित्सा और अन्य जरूरी सेवाओं में लचीला रुख अपनाने की बात भी कही है।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने 10 केवीए से ज्यादा की क्षमता वाले डीजल से चलने वाले जनरेटरों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। आवश्यक वस्तु उत्पादन इकाइयों को मिली छूट भी अब समाप्त कर दी गई है। 30 सितंबर तक सभी डीजल जनरेटर संचालकों को गैस किट लगवाने को कहा गया है। दूसरी और शहर में अभी भी कई ऐसी सोसाइटियां हैं जिनमें बिजली की आपूर्ति डीजल के जेनरेटर से ही हो रही है क्योंकि अभी तक वहां 33 केवीए का सब स्टेशन नहीं बना है। इनमें से अधिकांश न्यू गुरुग्राम में हैं।
हरित ऊर्जा के लिए स्वयं को तैयार कर लें : याचिकाकर्ता
जनरेटरों से होने वाले प्रदूषण के मुद्दे को राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण में ले जाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता रमन शर्मा कहते हैं कि पर्यावरण के हित में और आने वाली पीढि़यों के हित को ध्यान में रखते हुए अब समय आ गया है कि लोग अपनी मानसिकता बदलें। वह स्वयं को हरित ऊर्जा के लिए तैयार कर लें। जेनरेटर को गैस चलित जनरेटर में बदलने में कुछ खर्चा होगा। ईंधन की उपलब्धता में शुरू में कुछ समस्या हो सकती है। हमारे अपने हित को देखते हुए यह कीमत बहुत कम है।
गुरुग्राम में लगातार बढ़ती है बिजली की मांग, इसलिए पड़ती है जनरेटर की जरूरत
- वितरण में सुविधा की दृष्टि से शहर में सर्किल-1 और सर्किल-2 में विभाजित किया गया है।
- दोनों ही सर्किल में बिजली की मांग 2000 मेगावाट को भी पार कर चुकी है।
- जून 2022 में बिजली की मांग शहर में 1800 मेगावाट से अधिक रही।
- मौजूदा समय में मांग और आपूर्ति में करीब 300 ले 400 मेगावाट तक का अंतर है।
- उपभोक्ताओं को प्रतिदिन 362 लाख यूनिट आपूर्ति हो रही थी।
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सरकार से मांग, फैसले पर विचार कर लें : अध्यक्ष, औद्योगिक संगठन
कदीपुर इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के अध्यक्ष श्रीपाल शर्मा कहते हैं कि सरकार से मांग रखी है कि इस तरह जनरेटरों पर प्रतिबंध लगाए जाने से औद्योगिक उत्पादन पर प्रभाव पड़ेगा। अभी 24 घंटे बिजली आपूर्ति की व्यवस्था नहीं है। साथ ही पीएनजी गैस आधारित ईंधन के लिए भी पाइप लाइनें नहीं बिछाई गई हैं। बिना विकल्प तैयार किए प्रतिबंध लगाना हजारों कारीगरों की आजीविका को भी प्रभावित कर सकता है। इसलिए जनहित में होगा कि इस फैसले पर फिर से विचार किया जाए।
रोक के पक्ष में दलीलें (एनजीटी में याचिकाकर्ता)
- पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य को बचा पाएंगे
- गैस के ईंधन से शोर नहीं होगा, लागत भी कम होगी
- विश्व स्तर पर उत्सर्जन कम करने की वचनबद्धता पूरी होगी
औद्योगिक संगठनों की दलीलें (फैसला आगे बढ़ाने के लिए)
- अभी 24 घंटे बिजली आपूर्ति नहीं है, पीएनजी की लाइनें भी नहीं
- उद्योगों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा, हजारों श्रमिक रोजगार खो सकते हैं
- औद्योगिक उत्पादन में गिरावट आने से अन्य समस्याएं पैदा होंगी
एनजीटी के आदेश के अनुसार डीजल जनरेटरों पर रोक लगाने की पूरी तैयारी है। चिकित्सा और अन्य ऐसी ही जरूरी सेवाओं में अनुमति दी जा सकती है। इसके अलावा अन्य किसी उपक्रम के लिए इजाजत नहीं होगी। -प्रदीप डागर, सचिव, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, हरियाणा