डीईओ, डीईईओ व डीपीसी तीनों अधिकारियों के पद खाली
शेरसिंह डागर
नूंह। सरकार भले ही नूंह जिले में शिक्षा को बढ़ावा देने का दावा करती हो, लेकिन स्कूलों में स्टाफ व संसाधनों तक ही नहीं, यहां खाली पड़े जिलास्तरीय तीनों अधिकारियों के पद इस दावे की पोल खोल रहे हैं। यहां पिछले काफी दिनों से डीईओ व डीईईओ जहां भ्रष्टाचार में जेल की हवा खा रहे हैं वहीं एसपीडी का पद भी कई महीनों से खाली है। ऐसे में जहां स्कूलों का सुपरविजन नहीं हो रहा है वहीं इन अधिकारियों के न होने से तमाम कागजी कार्रवाई रुकी है, जबकि मार्च का महीना चल रहा है। विभाग के कर्मचारियों से लेकर स्कूल में पढ़ रहे छात्रों तक को भारी नुकसान हो रहा है, लेकिन सुनने वाला कोई नहीं है, जबकि इस बारे में चंडीगढ़ में बैठे अधिकारियों से लेकर शिक्षा मंत्री तक को जानकारी है। हालात ये भी हैं कि जिले के स्कूलों में अधिकारियों से लेकर प्राइमरी स्कूल टीचर तक के करीब साढ़े चार हजार पद रिक्त हैं। सरकार की अनदेखी का यह आलम तब है, जब केंद्र सरकार ने नूंह जिले को देश के अति पिछड़े जिलों की श्रेणी में रखा है।
बता दें कि नूंह जिले में 950 स्कूल हैं, जिनमें 126 सीनियर सेकेंडरी, 8 हाई स्कूल, 306 मिडिल स्कूल, 500 प्राइमरी स्कूल हैं तो पांच आरोही मॉडल तथा पांच कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय हैं। जिनमें करीब दो लाख छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। जिले की कुल साक्षरता दर लगभग 54 प्रतिशत है। जिसमें पुरुष साक्षरता दर लगभग 69 प्रतिशत है तो महिला साक्षरता दर 36 प्रतिशत है। मेव महिला साक्षरता दर करीब दस प्रतिशत है। यहां साक्षरता दर कम होने से गरीबी भी है, जिसके कारण नूंह जिला केंद्र सरकार के अति पिछड़े जिलों की श्रेणी में है।
छात्रों की नींव रखने वाले प्राइमरी स्कूलों का सबसे बुरा हाल है। यहां स्कूलों में 1061 पद रिक्त हैं। ऐसे में बच्चों की नींव काफी कमजोर रहती है और वो आगे चलकर पढ़ाई छोड़ देते हैं। यही कारण है कि यहां पांचवीं के बाद करीब 60 प्रतिशत छात्र ड्राप आउट हो जाते हैं। नीति आयोग ने यह जग-जाहिर कर दिया कि मेवात सबसे पिछड़ा हुआ जिला है। इसके बाद भी प्रदेश व केंद्र सरकार गंभीर नहीं है।
जिला स्तरीय तीनों अधिकारियों के पद रिक्त होने के कारण यहां भारी दिक्कत हो रही है। अध्यापक सुपरविजन न होने के कारण अपनी मर्जी से स्कूल आ-जा रहे हैं, जिससे पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इसके अलावा मार्च में क्लोजिंग होने के कारण तमाम काम रुके हुए हैं। सैकड़ों स्कूल ऐसे हैं, जहां मूलभूत सुविधाओं का टोटा है। कहीं पढ़ाई संबंधित एजुसेट व अन्य पाठ्यसामग्री नहीं है तो कहीं पेयजल, शौचालयों का बुरा हाल है। जहां-तहां बिल्डिंग भी जर्जर हैं।
हमने इस बारे में उच्च अधिकरियों को लिखा है। जल्द ही कोई न कोई अधिकारी यहां तैनात किया जाएगा। जो स्टाफ है, उससे काम चलाया जा रहा है। इस बारे में भी ऊपर अवगत कराया हुआ है।
अजय कुमार , उपायुक्त नूंह।
फोटो- एक स्कूल में खेलती हुई छात्राएं