फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Gurugram News: चिंटेल्स पैराडाइसो सोसाइटी के असुरक्षित टावरों को तोड़ने के लिए मांगी पुलिस सुरक्षा

विज्ञापन
विज्ञापन
पानी, बिजली और फायर सिस्टम को टावरों से निकालकर बाहर लगाया जाना है
विज्ञापन



अमर उजाला ब्यूरो

गुरुग्राम। सेक्टर-109 स्थित चिंटेल्स पैराडाइसो सोसाइटी के असुरक्षित पांच टावरों को तोड़ने के काम में देरी हो रही है। ऐसे में बिल्डर ने उपायुक्त को पत्र लिखकर पुलिस बल मांगा है। जिससे असुरक्षित टावरों से केंद्रीयकृत बिजली, पानी व फायर सिस्टम को निकालकर बाहर लगाया जा सके। बिल्डर का कहना है कि कुछ लोग इस कार्य में रुकावट पैदा कर रहे हैं।
चिंटेल्स इंडिया के उपाध्यक्ष जेएन यादव ने बताया कि सुरक्षित ए,बी और सी टावर के लोगों के लिए बिजली, पानी और फायर जैसी सुविधाएं देना है। ऐसे में असुरक्षित टावरों को तोड़ने से पहले इन सुविधाओं को बाहर लगाना होगा। यादव ने बताया कि इस कार्य में स्थानीय आरडब्ल्यूए सहयोग नहीं कर रहा है और काम में रुकावट डाल रहा है। इससे टावरों को तोड़ने में देरी हो रही है। टावरों को तोड़ने की अनुमति पहले ही उपायुक्त से मिली हुई है। उपाध्यक्ष का कहना है कि मंडलायुक्त ने टावरों को तोड़ने का समय छह से आठ माह का दिया हुआ है। ऐसे में बिजली,पानी और फायर जैसी सुविधाओं को बाहर किए बिना टावरों को तोड़ना संभव नहीं है। उन्होंने प्रशासन से पुलिस सुरक्षा मांगी है ताकि इन सुविधाओं को असुरक्षित टावरों से निकाला जा सके। वहीं बिल्डर से जे टावर को खाली कराने की दोबारा बात कही है। इस टावर में अभी कुछ लोग रह रहे हैं। कंपनी ने पांच टावरों के फ्लैटों में लगी खिड़कियों, पाइप, दरवाजे, फायर सिस्टम समेत अन्य सामानों को निकाल लिया है। उपाध्यक्ष ने बताया कि नोएडा की एडिफिस कंपनी को टावरों को तोड़ने का ठेका दिया गया है। ।
विज्ञापन
विज्ञापन

चिंटेल्स पैराडाइसो सोसाइटी आरडब्ल्यूए के प्रधान राकेश हुड्डा ने बताया कि चिंटेल्स के असुरक्षित टावरों में डी, ई, एफ, जी और एच को तोड़ा जाना है। असुरक्षित टावरों से सुविधाओं को शिफ्ट करने के लिए बिल्डर को उपायुक्त से मंजूरी लेना चाहिए। उन्होंने बताया कि आरडब्ल्यूए बिल्डर का पूरा सहयोग कर रहा है। बिल्डर को जल्द ही टावरों को बड़े स्तर पर तुड़वाने का काम करन चाहिए। बता दें कि बीते वर्ष 10 फरवरी को टावर डी में हुए हादसे में दो महिलाओं की जान चली गई थी। उसके बाद आईआईटी दिल्ली की टीम को टावरों के संरचनात्मक ऑडिट की जिम्मेदारी दी गई थी। इसके बाद इन टावरों को तोड़ा जा रहा है। दूसरी ओर सोसाइटी के एक निवासी डीसी निशांत यादव ने ईमेल किया है। इसमें कहा गया कि 33 केवी स्टेशन चालू करने की बिल्डर ने प्रतिबद्धता जताई थी। उनका कहना है कि डीजी संचालन के लिए औसतन प्रतिदिन न्यूनतम 1000 से 2000 रुपये का भुगतान बिल्डर को कर रहे हैं। चिंटेल्स बार-बार बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने में विफल रहा है। 33 केवी सबस्टेशन एक ही सेक्टर के पैराडाइसो, सेरेनिटी आदि कुल 5 सोसाइटियों के लिए है। यदि पैराडाइसो के कोई भी निवासी चिंटेल्स के खिलाफ इस तरह के मुद्दों को उठाते रहते हैं तो उन्हें भी चिंटेल्स द्वारा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से निशाना बनाया जाता है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें