प्रतिबंधित प्लास्टिक का जमकर हो रहा उपयोग, 2 अक्तूबर 2019 को रेल मंत्रालय ने लगाई थी रोक
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। 2 अक्तूबर वर्ष 2019 को रेल मंत्रालय ने प्लास्टिक मुक्त रेलवे अभियान की शुरुआत की थी। इसके अंतर्गत एक बार उपयोग होने वाली प्लास्टिक यानी सिंगल यूज प्लास्टिक पर रोक लगा दी गई थी, लेकिन इस राेक का असर गुरुग्राम रेलवे स्टेशन पर नहीं दिख रहा। स्टेशन पर मौजूद छोटे वेंडर से लेकर एमपीएस स्टॉल विक्रेता तक प्रतिबंधित प्लास्टिक का जमकर उपयोग कर रहे हैं।
इस पर रोक की जिम्मेदारी स्टेशन मास्टर व वाणिज्यिक निरीक्षक की थी, लेकिन इसके लिए रेलवे की ओर से काेई प्रयास नहीं किया गया। नतीजतन पूर्व रेलमंत्री पीयूष गोयल की घोषणा के चार साल बाद भी गुरुग्राम रेलवे स्टेशन प्लास्टिक से मुक्त नहीं हो पाया। रेल मंत्रालय ने प्लास्टिक की बोतलों को रिसाइकिल करने की भी सलाह दी थी। इसके लिए रेलवे स्टेशन पर बोतल क्रशिंग मशीन होना अनिवार्य है, जबकि गुरुग्राम रेलवे स्टेशन ऐसी कोई मशीन नहीं है।
आठ दुकानों से प्रतिदिन बिक रहीं पानी की 500 बोतलें
वेंडर रामपाल के मुताबिक स्टेशन पर आठ दुकाने हैं। एक दुकान से एक दिन में औसतन 60 बोतलें बिक जाती हैं, यानी कुल 500 से अधिक। इसके अलावा जूस, कोल्डड्रिंक, इत्यादि की बोतलें अलग हैं। इतनी बड़ी मात्रा में रोजाना प्लास्टिक रिसाइकिल होने की बजाय कूड़े के ढ़ेर में जा रहा है। रेलवे अधिकारियों की लापरवाही के कारण पर्यावरण दूषित हो रहा है।
वेंडर बोला आदेश की जानकारी नहीं
संवाददाता ने जब वेंडर से पॉलीबैग की डिमांड की तो उसने झट से निकालकर दे दिया। पूछने पर उसने बताया कि उसे रेलवे के प्लास्टिक संबंधी आदेश की जानकारी नहीं है।
वॉटर वेंडिंग मशीन का टेंडर खत्म होने से बढ़ रही पानी की बोतलों की खरीद
आईआरसीटीसी ने गुरुग्राम रेलवे स्टेशन पर वॉटर वेंडिंग मशीन लगाई थी। इन मशीनों के जरिए स्टेशन पर मौजूद रेल यात्रियों को कम पैसे पर शुद्ध पेयजल मिलता था। इसके बंद होने से रेल यात्रियों को पानी की बोतल खरीदनी पड़ रही है। इससे प्लास्टिक कचरा बढ़ रहा है, जिसे रोकने के रेलवे की ओर से कोई प्रयास नहीं हो रहा।
सिंगल यूज प्लास्टिक के अंदर का रसायन खतरनाक
पर्यावरणविद् विवेक कांबोज ने बताया कि सिंगल यूज प्लास्टिक के अंदर जो रसायन होते हैं, उनका इंसान और पर्यावरण पर काफी बुरा असर पड़ता है। प्लास्टिक की वजह से मिट्टी का कटाव काफी होता है। इसके अंदर का केमिकल बारिश के पानी के साथ जलाशयों में जाता है, जो काफी खतरनाक होता है।
ये था सरकार मकसद
भारतीय रेल को कूड़ा उत्पादक के ताैर पर जाना जाता रहा है। यही कारण है कि मंत्रालय ने यह फैसला लिया है, ताकि प्लास्टिक के कचरे का उत्पादन कम हो सके और पर्यावरण के अनुकूल कचरे का निपटान हो सके।
वर्जन
रेलवे ने आदेश तो जारी किया है, लेकिन यात्री अक्सर पॉलीबैग की डिमांड करते हैं। इसलिए विक्रेता को रखनी पड़ती है। प्लास्टिक के कचरे पर रोक के लिए क्रशिंग मशीन रेलवे स्टेशन पर स्थापित की जाएगी। इसके साथ ही वॉटर वेंडिंग मशीन का टेंडर भी जल्द बहाल कर दिया जाएगा, जिससे लोगों पेयजल की जरूरत होने पर बोतल ना खरीदनी पड़े। - शंकरलाल मीणा, स्टेशन मास्टर गुरुग्राम।