निगमायुक्त और चीफ इंजीनियर को शिकायत के बाद जांच शुरू
पूर्व मंत्री के रिश्तेदार को चार जोन का काम देने का आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। अपनी कार्यशैली और लापरवाही के कारण चर्चा में रहने वाले नगर निगम में अब सफाई टेंडर को लेकर बवाल शुरू हो गया है। शहर के प्रबुद्ध लोगों के साथ कुछ एजेंसी संचालकों ने इस टेंडर के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए इसका विरोध किया है। विरोध स्वरूप टेंडर पाने वाली कंपनियों पर गंभीर आरोप लगाकर नगर निगम आयुक्त को इसकी शिकायत की गई है। शिकायत के बाद निगमायुक्त ने पूरे मामले की छानबीन और जांच के लिए निगम के चीफ इंजीनियर को जिम्मेदारी सौंप दी है। निगमायुक्त के आदेश के बाद चीफ इंजीनियर राधेश्याम शर्मा ने शिकायतकर्ताओं से मुलाकात कर लिखित में उनकी शिकायत ले ली है और जांच का आश्वासन दिया है। चीफ इंजीनियर से मुलाकात के दौरान टेंडर में भाग लेने वाली एजेंसी संचालकों ने आरोप लगाया कि एक पूर्व मंत्री के रसूख के कारण उसके रिश्तेदार को दो जोन का टेंडर अलॉट कर दिया गया है। जबकि इस कंपनी के पास ना पूरे दस्तावेज है और न अनुभव। इनका यह भी आरोप है कि उनके लंबे अनुभव को नजरअंदाज कर उनके आवेदन निरस्त कर दिए गए हैं। नगर निगम की विशेष कमेटी ने आवेदन करने वाली एजेंसियों की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए उनकी आपत्ति दर्ज कर ली है और जांच में जुट गया है। साथ ही इस पर कानूनी राय लेने की भी तैयारी की जा रही है। सलीके से जांच हुई तो उक्त टेंडर रद्द भी हो सकते हैं। ऐसे में नगर निगम को शहर की सफाई के लिए नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया शुरू करनी होगी।
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नियमों को दरकिनार कर दिए जा रहे टेंडर
एक महीने पहले जारी किए गए 250 करोड़ रुपये के सफाई टेंडर में करीब 15 एजेंसियों ने आवेदन किए थे। इनमें से आठ एजेंसियों को दो साल के लिए आठ जोन का काम दिया जाना है। टेंडर की शर्तों में एजेंसी के पास मैन पावर, अनुभव और तमाम उपकरण होना जरूरी है। इसके अलावा यह भी शर्त है कि टेंडर की कीमत के आधे बजट के काम एजेंसी पहले कर चुकी हो। दो दिन पहले नगर निगम ने टेंडर खोल दिए। कुछ एजेंसियों का आरोप है कि नियमों को दरकिनार कर निगम में सफाई के टेंडर दिए जा रहे हैं। इसमें दो एजेंसियों को चार जोन का काम दे दिया गया। यह प्रदेश के एक पूर्व मंत्री मंत्री के रिश्तेदार की हैं। दोनों एजेंसियां अलग- अलग नाम से एक ही व्यक्ति की है इसके अलावा जिन चार अन्य एजेंसियों को काम दिया गया, उनके पास अनुभव नहीं है। अन्य एजेंसियों पर दस्तावेज में हेरफेर का आरोप है।
निगम आयुक्त के पास पहुंची शिकायत
इसकी शिकायत नगर निगम आयुक्त से की गई है। शिकायत के बाद मंगलवार को शिकायत कर्ता एजेंसी संचालकों ने चीफ इंजीनियर से मिलकर अपनी आपत्ति लिखित में सौंपी। चीफ इंजीनियर के नेतृत्व में बनी विशेष कमेटी के सामने एजेंसी संचालकों ने कहा कि उनके पास अनुभव है, दस्तावेज दुरुस्त है और दूसरी अन्य शर्तें भी पूरी करते हैं। बावजूद इसके उनके आवेदन रद्द कर दिए गए। इन लोगों ने पूरी टेंडर प्रक्रिया की जांच कर अनुभवी एजेंसी को काम सौंपने की मांग की है।
शिकायतकर्ता एजेंसी संचालकों से उनकी आपत्ति ले ली गई हैं। कमेटी के सामने उन्होंने अपनी बात रखी है। इसकी जांच होगी और पूरे मामले में कानूनी राय भी ली जाएगी।
राधेश्याम शर्मा, चीफ इंजीनियर, नगर निगम