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अपने स्वभाव में विकसित करनी चाहिए प्रसन्नता : प्रो. ओंकार चंद

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गुरुग्राम। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की ओर से चलाए जा रहे आध्यात्मिक चेतना अभियान के तहत डीएलएफ-5 स्थित द कैमेलियास के हॉबी स्टूडियो में ओवरकमिंग ओवरथिंकिंग : मानसिक कोलाहल से आंतरिक शांति की ओर विषय पर विशेष सत्र आयोजित किया गया। शहर के सबसे प्रतिष्ठित आवासीय परिसर कैमेलियास में आयोजित सत्र के मुख्य वक्ता माउंट आबू से आए अंतरराष्ट्रीय प्रेरक वक्ता राजयोगी प्रो. ओंकार चंद रहे। उन्होंने कहा कि जीवन की सबसे बड़ी पूंजी मन की सहज प्रसन्नता है। व्यक्ति को मुस्कुराने के लिए बाहरी परिस्थितियों पर निर्भर रहने के बजाय अपने स्वभाव में प्रसन्नता विकसित करनी चाहिए। ब्यूरो
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