गुरुग्राम। श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ के पांचवें दिन भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीला व गोवर्धन पूजा के प्रसंगों का संगीतमय शैली में वर्णन किया। कथाव्यास आराधना देवी ने बताया कि अभिमान व सुखी रहने की इच्छा प्रक्रिया कहलाती है। इसे न तो कर्तव्य का अभिमान है और न ही सुखी रहने की इच्छा, बल्कि दूसरों को सुखी रखने की इच्छा को लीला कहते हैं। भगवान श्रीकृष्ण ने यही लीला की, जिससे समस्त गोकुलवासी सुखी और संपन्न थे। संवाद