केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी देश के पहले एलिवेटेड हाईवे द्वारका एक्सप्रेसवे का निरीक्षण करने के लिए गुरुग्राम पहुंचें। यहां उन्होंने एलिवेटेड हाईवे द्वारका एक्सप्रेसवे का निरीक्षण किया। इस दौरान केंद्रीय राज्य मंत्री और स्थानीय सांसद राव इंद्रजीत सिंह, केंद्रीय राज्यमंत्री जनरल वीके सिंह और दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना मौजूद रहे। द्वारका एक्सप्रेसवे 9 हजार करोड़ रुपए की लागत से बन रहा है और इसकी लंबाई 29 किलोमीटर है। गडकरी के आने से पहले ही प्राधिकरण ने भी अपनी तैयारी पूरी कर ली थी।
हरियाणा और दक्षिणी दिल्ली को जोड़ने वाला द्वारका एक्सप्रेसवे का चार हिस्सों में बांटकर निर्माण किया है। जिनमें दिल्ली क्षेत्र के 10.01 किमी क्षेत्र को दो और हरियाणा क्षेत्र में 18.9 किमी क्षेत्र को भी दो क्षेत्रों में रखा गया है। हरियाणा क्षेत्र के दोनों क्षेत्रों में निर्माण कार्य 93.2 और 99.25 फीसदी तक पूरा हो चुका है और पूरी उम्मीद है यह दोनों क्षेत्र जुलाई तक चालू हो जाएंगे। वहीं दिल्ली क्षेत्र का कार्य वर्ष 2024 में पूरा होगा। हालांकि यहां पर क्लोवर लीफ पर वाहन चल रहे हैं। इसे खोला नहीं गया है। लेकिन वाहन चालक स्वयं ही इसका उपयोग कर रहे हैं।
द्वारका एक्सप्रेसवे इन सुविधाओं से लैस
पिछले हफ्ते उपायुक्त निशांत कुमार यादव एनएचएआई और अन्य अधिकारियों के साथ खेड़की दौला स्थित क्लोवर लीफ पहुंचकर द्वारका एक्सप्रेसवे पर निर्माण कार्य का जायजा ले चुके हैं। इस प्रोजेक्ट के निर्माण पर करीब 9 हजार करोड़ रुपये की अनुमानित लागत है। इस एक्सप्रेसवे पर यातायात की सुगमता और सफर करने वालों की सुरक्षा के लिए आईटीएस, एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम, टोल मैनेजमेंट सिस्टम, सीसीटीवी कैमरा, सर्विलांस आदि अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल होगा।
एक्सप्रेसवे के निर्माण के साथ बन रहे ये रिकॉर्ड
दो लाख एमटी स्टील का प्रयोग। एफिल टावर की तुलना में 30 गुना अधिक है।
20 लाख सीयूएम कंक्रीट का इस्तेमाल, जो बुर्ज खलीफा की तुलना में छह गुना अधिक है।
12 हजार वृक्षों का ट्रांसप्लांट किया गया, भारत में इतने बड़े स्तर पर पहली बार ऐसा हुआ है।
एक और योजना
गडकरी ने बताया कि हमारी आने वाली परियोजनाओं में इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से जेवर हवाई अड्डे और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के बीच कनेक्टिविटी शामिल है। यह सड़क 3,000 करोड़ रुपये की लागत से बनेगी और 32 किलोमीटर लंबी होगी। जून 2025 तक यह प्रोजेक्ट पूरा होगा।