टाटा कंपनी के मैकेनिक नई बसों की कर रहे जांच
अपने पहले ही सफर में हांफ गईं पांच करोड़ की बस
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। करोड़ों रुपये की लागत से खरीदी गईं बीएस-6 वर्जन की नई रोडवेज बसें अपने पहले ही सफर में हांफ चुकी हैं। यात्रियों की सुविधा के लिए इन बसों को विभिन्न रूटों पर भेजा गया, मगर यह बस रफ्तार ही नहीं पकड़ पाईं। इसके साथ ही इन बसों से ज्यादा धुआं निकलने की शिकायत की बात भी सामने आई है। ऐसे में करीब एक माह पहले ही मिलीं इन बसों को अब दोबारा से गुरुग्राम डिपो में ही खड़ा कर दिया गया है। टाटा कंपनी की यह बीस बस सरकार को करीब पांच करोड़ रुपये में पड़ी थीं।
अपने पहले ही सफर के बाद जब यह बसें वापस गुरुग्राम पहुंची तो बसों के चालक-परिचालकों ने बसों के कम रफ्तार में चलने व धुआं देने की शिकायत डिपो प्रबंधन से की। इसके बाद लोकल स्तर पर इनकी जांच की गई तो पता चला कि बसों में कोई तकनीकी खामी है। चूंकि बसें बिल्कुल नई थीं, ऐसे में तत्काल ही टाटा कंपनी को इसकी जानकारी दे दी गई। फिलहाल इन सभी बसों को रूट से हटा लिया गया है। सभी 20 बसों को गुरुग्राम डिपो की कार्यशाला परिसर में खड़ा किया गया है।
टाटा कंपनी की बीएस-6 तकनीक वाली बसों की खराबी को लेकर अलग-अलग तर्क दिए जा रहे हैं, लेकिन वास्तव में नई बसों में क्या खराबी है इसके बारे में कोई कुछ नहीं बोल रहा है। बताया जा रहा है कि बसों में डाले गए ऐड ब्लू में कोई दिक्कत है। इसलिए बसें धुआं दे रही हैं, तो कोई डीजल में कमी को लेकर अपने तर्क दे रहा है। जबकि डिपो अधिकारियों की माने तो बसों में तकनीकी खराबी आई है। टाटा कंपनी की टीम सभी 20 नई बसों की जांच कर रही है।
एक माह पहले पहुंची थीं बसें
टाटा कंपनी की ओर से लगभग एक माह पहले बीएस-6 तकनीक वाली नई बसों को गुरुग्राम डिपो में भेजा गया था। पहले इन बसों के इंश्योरेंस नहीं बन पाने के कारण लगभग 20 दिनों तक यह बसें गुरुग्राम डिपो परिसर में खड़ी रही थीं। दस्तावेज पूरे होने के बाद इन बसों को रूटों पर भेजा जाने लगा, लेकिन यह बसें रोड पर चलते समय अपनी रफ्तार नहीं पकड़ सकीं। जिसके बारे में चालक-परिचालकों ने डिपो में बताया। सभी 20 बसों को रूटों पर भेजा गया, जिसमें धीमी रफ़्तार और ज्यादा धुआं देने की समस्या रही।
एक बस पर लगभग 25 लाख की लागत
धारूहेड़ा की एक कंपनी में तैयार की गई टाटा कंपनी की एक बीएस-6 बस की कीमत लगभग 25 लाख रुपये हैं। हालांकि गुरुग्राम डिपो के अधिकारियों व कर्मचारियों को नई रोडवेज बसों की सही कीमत की जानकारी नहीं है। टाटा कंपनी की 20 बसों की कीमत लगभग पांच कराेड़ रुपये हैं। यह बसें गुरुग्राम डिपो के परिसर में लगभग एक माह से ख़ड़ी हैं।
गुरुग्राम डिपो में बसों की संख्या
गुरुग्राम डिपो में 134 रोडवेज बसें हैं, जिनका अलग-अलग रूटों पर संचालन किया जा रहा है। जिसमें छह वॉल्वो बसें गुरुग्राम से चंड़ीगढ़ रूट पर चल रही हैं। 35 पुरानी ऑडनरी बसें, अशोक लीलैंड कंपनी की 24 बसें, 20 मिनी बसें और 35 बसें किलोमीटर स्कीम के तहत रूटों पर भेजी जा रही हैं। जबकि टाटा कंपनी की 20 नई बसों को रूटों पर उतारा गया था, लेकिन बसों में खराबी आने के बाद बस डिपो में खड़ा किया गया है। जिनको ठीक होने के बाद दोबारा से रूटों पर भेजा जाएगा।
क्या कहती हैं टीएम
गुरुग्राम बस डिपो की यातायात प्रबंधक (टीएम) रितु शर्मा का कहना है कि नई बसों में कुछ तकनीकी खराबी आई है। जिसको टाटा कंपनी के मैकेनिक ठीक कर रहे हैं। क्या खराबी आई है, इसके बार तकनीकी विभाग ही बता सकता है। इसके बारे में उन्हें जानकारी नहीं है।
क्या कहते हैं फोरमैन
गुरुग्राम बस डिपो के फोरमैन रणधीर सिंह का कहना है कि बसों में तकनीकी समस्या हैै, जिसको ठीक किया जा रहा है। ऐड ब्लू या डीजल संबंधित कोई समस्या नहीं है। टाटा कंपनी की तकनीकी टीम बसों को जांच रही है। जल्द ही समस्या को दूर कराकर बसों को रूटों पर भेजा जाएगा।