-परिजनों ने दहेज प्रताड़ना व हत्या का दर्ज कराया था केस
अमर उजाला ब्यूरा
गुरुग्राम। गवाहों व सबूताें के अभाव में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश तरुण सिंगल की कोर्ट ने दहेज के लिए प्रताड़ित करने और हत्या करने के आरोपी को बरी कर दिया है। कोर्ट की सुनवाई के दौरान खुलासा हुआ कि महिला पति के साथ गुरुग्राम रहना चाहती थी। इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद होता था।
गुलामऊ गांव जिला हरदोई यूपी निवासी रामबिलास ने सेक्टर-53 थाना पुलिस में 17 दिसंबर 2021 को दी शिकायत में बताया था कि छोटी बेटी प्रियंका की शादी 30 मई 2021 को औहदपुर हरदोई यूपी निवासी अरबिन्द वर्मा के साथ हुई थी। उनका कहना था कि बेटी की शादी में अपनी हैसियत अनुसार दान दहेज दिया था, लेकिन इससे दामाद अरबिन्द खुश नहीं था। करीब दो माह पहले ही बेटी प्रियंका गांव से अरबिन्द के साथ गुरुग्राम में आई और गांव वजीराबाद में मकान किराये पर लेकर पति-पत्नी रह रहे थे। पड़ोस मेंं ही अरबिन्द की मां सुनीता अपने दूसरे बेटे गोविंद व उसकी पत्नी रेखा के साथ रहती थी।
पिता ने पुलिस को बताया था कि उसके बेटे सरवेन्द्र के मोबाइल पर गोविंद का फोन आया कि प्रियंका ने फांसी लगा ली है। पिता ने अरबिन्द पर दहेज के लिए परेशान व मारपीट करने का आरोप लगाया था। उनका शक था कि बेटी को मारकर लटकाया गया है। पुलिस ने शिकायत पर आईपीसी की धारा 498ए, 304बी केस दर्ज कर लिया था। यह मामला अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश तरुण सिंगल की कोर्ट में चला। सुनवाई के दौरान पुलिस ने 13 गवाह पेश किए। हालांकि जांच में पुलिस ने पाया कि जिस कमरे में महिला का शव लटका मिला था, वह अंदर से बंद था और मौके पर पति नहीं था। इस केस के जांच अधिकारी ने कमरे का दरवाजा तोड़कर बाहर निकाला था। ऐसे में पति पर दहेज हत्या का केस नहीं माना जा सकता।
मेडिकल रिपोर्ट में शरीर पर चाेट के निशान नहीं थे, मौत दम घुटने से हुई थी। पुलिस जांच में पाया गया कि महिला अपने पति के साथ गुरुग्राम में रहना चाहती थी। ऐसे में दोनों के बीच विवाद था। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने एक दिसंबर को आरोपी को बरी कर दिया। कानूनी विशेषज्ञ वरिष्ठ वकील डॉ. अंजू रावत नेगी ने कहा कि कई बार पुलिस दबाव में ऐसे केस दर्ज कर लेती है। बाद में सबूत और गवाह कोर्ट में केस टिक नहीं पाते हैं। ऐेसे में पुलिस को इस प्रकार के केस में संजीदता बरतनी चाहिए।