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Gurugram News: द्वारका एक्सप्रेस-वे के क्लोवर लीव पर मियावाकी तकनीक से विकसित होंगे चार छोटे वन

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एनएचएआई के अध्यक्ष संतोष कुमार यादव ने किया द्वारका एक्सप्रेस-वे का निरीक्षण
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जल्द होगी दिल्ली की राह आसान, आखिरी चरण में चल रहा है निर्माण

अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के महिपालपुर से गुरुग्राम में एनए- 48 स्थित खेड़की दौला को जोड़ने के लिए तैयार किए जा रहे द्वारका एक्सप्रेस-वे का निर्माण कार्य आखिरी चरण में है। इस एक्सप्रेस-वे के लिए बजघेड़ा से एनएच-48 पर बनने वाले क्लोवर लीव पर चार छोटे जंगल विकसित किए जाएंगे। मियावाकी तकनीक से विकसित किए जाने वाले इन छोटे जंगल और एक्सप्रेस-वे के निर्माण कार्य की प्रगति को देखने के लिए एनएचएआई के अध्यक्ष संतोष कुमार यादव ने शनिवार को मौके का निरीक्षण किया।
द्वारका एक्सप्रेस-वे का निर्माण अंतिम चरण में चल रहा है। माना जा रहा है कि जल्द ही दिल्ली की राह और आसान होगी। जीएमडीए के सीईओ पीसी मीणा और गुरुग्राम के उपायुक्त निशांत कुमार यादव ने बजघेड़ा के पास एनएचएआई के अध्यक्ष संतोष कुमार यादव का स्वागत किया। अध्यक्ष के आगमन को लेकर एनएचएआई द्वारा द्वारका एक्सप्रेस-वे पर जारी कार्यों की प्रगति पर आधारित फोटो प्रदर्शनी भी लगाई गई थी।
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भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अध्यक्ष ने एनएच-48 पर स्थित क्लोवर लीफ के सभी चार बिंदु पर हरियाली को बढ़ावा देने के लिए मियावाकी तकनीक का उपयोग करते हुए चार छोटे वन (मिनी अमेजॉन) विकसित करने की बात कही। इससे लोगों को यहां से गुजरते हुए हरियाली का अहसास होगा। उन्होंने कहा कि इस एक्सप्रेस-वे के शुरू होने से गुरुग्राम और दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी, साथ ही इस परियोजना में टनल, अंडरपास, फ्लाईओवर और फ्लाईओवर के ऊपर भी फ्लाई ओवर होंगे।
उन्होंने बताया कि हरियाणा प्रदेश के हिस्से में इस सड़क की लंबाई 18.9 किलोमीटर है। जबकि दिल्ली सीमा में इसका हिस्सा 10.1 किलोमीटर का है। एनएचएआई अध्यक्ष ने जीएमडीए के सीईओ, उपायुक्त और एनएचएआई के अन्य अधिकारियों के साथ परियोजना को लेकर आपसी समन्वय से जुड़े कार्यों के बारे में भी विस्तार से चर्चा की।
करीब 9000 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे द्वारका एक्सप्रेस-वे के लिए उन्होंने जीएमडीए व अन्य एजेंसियों को ड्रेनेज सिस्टम आदि को लेकर आवश्यक दिशा निर्देश भी दिए। इस दौरान एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी मोहम्मद शफी, प्रोजेक्ट इंचार्ज आकाश पाधी, नगर निगम गुरुग्राम के संयुक्त आयुक्त विजय यादव, जीएमडीए के कार्यकारी अभियंता विक्रम सिंह, विकास, संबंधित विभागों के अधिकारी व निर्माण एजेंसी के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
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क्या है मियावाकी तकनीक

यह एक जापानी वनीकरण विधि है। इसमें पौधों को कम दूरी पर लगाया जाता है, ताकि पौधे सूर्य की रोशनी हासिल कर ऊपर की ओर बढ़ते रहें। इसके तहत तीन प्रजातियों के पौधे लगाए जाते हैं, जिनकी ऊंचाई पेड़ बनने पर अलग-अलग होती है। इसमें एक पेड़ ऊंचाई वाला, दूसरा कम ऊंचाई वाला और तीसरा घनी छायादार पौधा चुना जाता है।
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