- ढाई साल से चल रहा था किडनी ट्रांसप्लांट का अवैध धंधा
- अब तक सौ से अधिक किडनी ट्रांसप्लांट करा चुका है गिरोह
मयंक तिवारी
गुरुग्राम। मुख्यमंत्री उड़नदस्ते की ओर से किडनी ट्रांसप्लांट के खुलासे के बाद मेडिकल इंड्रस्ट्री में हड़कंप है। गुरुग्राम सिटी का नाम लेकर बांग्लादेश के मरीजों को जाल में फंसाया जाता था। उन्हें सेक्टर-39 के आलीशान गेस्टहाउस में ठहराकर सारी मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती थीं। मरीज को पहले गुरुग्राम के नामी अस्पताल का हवाला देकर बरगलाया जाता था। बाद में उसी अस्पताल की जयपुर ब्रांच में उनका किडनी ट्रांसप्लांट कराया जाता था।
बांग्लादेश के रहने वाले मेहंदी मजूमदार ने बताया कि उनके कई जानकार मो. मुर्तजा अंसारी के माध्यम से हिन्दुस्तान में किडनी ट्रांसप्लांट करा चुके हैं। मुख्यमंत्री उड़नदस्ते के एक अधिकारी ने बताया कि 10 से 20 लाख रुपये के बीच में ट्रांसप्लांट कराने वालों से लिया जाता था। दलाल के माध्यम से ही किडनी देने वालों का चयन किया जाता था। जिन्हें मामूली रकम देकर किडनी देने के लिए तैयार किया जाता था। उनका ब्लड ग्रुप व अन्य जांच होने के बाद ही मेडिकल वीजा के माध्यम से हिन्दुस्तान लाया जाता था। अभी तक यह बात सामने आई है कि जिन लोगों ने अपनी किडनी दी है, उन्हें कोलकाता के मेडिकल वीजा पर भारत लाया जाता था। इसके बाद उन्हें गुरुग्राम में ठहराया जाता था। सदर थाना पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।
डीसीपी ईस्ट डॉ. मयंक गुप्ता ने बताया कि मामले की जांच के लिए एक टीम को जयपुर के लिए फोर्टिस अस्पताल भेजा जा रहा है। जहां पर होने वाले किडनी ट्रांसप्लांट की जांच की जाएगी। वहां यह भी जांच की जाएगी कि ट्रांसप्लांट में होने वाली कागजी कार्रवाई कहां से पूरी कराई जा रही थी।
किडनी देने वाले सभी है युवा:
पुलिस की जांच में इस बात का खुलासा हुआ है कि जिन लोगों ने अपनी किडनी बेची है, उसमे सभी युवा है। इनकी उम्र 24 से 32 वर्ष के बीच बताई जा रही है। किडनी देने के बदले उन्हें सिर्फ दो लाख रुपये ही दिए गए हैं। जबकि किडनी ट्रांसप्लांट कराने वालों की उम्र 66 वर्ष तक है। जिन लोगों ने किडनी डोनेट किया है, उनका आपस में खून का रिश्ता नहीं है। पुलिस कई बिंदुओं पर जांच कर ही है। किडनी प्रत्यारोपित कराने वालों से यह गैंग 10 से 20 लाख रुपये वसूलता था।
अस्पताल के कर्मचारियों से थी मिलीभगत:
गेस्ट हाउस में मिले मरीजों से पूछताछ में पता चला है कि मो. मुर्तजा अंसारी नामक युवक इन सभी को यहां लेकर आया था। जिन मरीजों का ट्रांसप्लांट नहीं हुआ था, उन्हें जयपुर के फोर्टिस अस्पताल ले जाने के लिए कहा गया था। वहीं दो मरीजों का ट्रांसप्लांट फोर्टिस से कराकर यहां लाया गया था। यह भी पता चला कि एजेंट अंसारी की जयपुर के फोर्टिस अस्पताल में कुछ कर्मचारियों के साथ मिलीभगत थी।
गुरुग्राम में पहले भी पकड़ा जा चुका है किडनी रैकेट:
किडनी रैकेट का गुरुग्राम में यह कोई पहला मामला नहीं है। साल 2008 में भी इसी तरह का एक मामला पालम विहार क्षेत्र में सामने आया था। जहां उत्तर प्रदेश से लोगों को लाकर उनकी किडनी निकाली जाती थी। यह किडनी संयुक्त राज्य अमेरिका, युनाइटेड किंगडम, कनाडा, सऊदी अरब और ग्रीक के ग्राहकों को प्रत्यारोपित की जाती थी। इस घोटाले के आरोपी डॉ अमित कुमार को 7 फरवरी 2008 को नेपाल से गिरफ्तार किया गया था। इस रैकेट के गुरुग्राम में चलाए जाने की सूचना भी उत्तर प्रदेश के एक गेस्ट हाउस से मिली थी। जब पुलिस ने गुरुग्राम में छापा मारा तो यहां से करीब दो दर्जन लोगों को छुड़ाया गया था। यहां किडनी निकालने के लिए पहले उन्हें नौकरी के लालच में क्लीनिक में बुलाया जाता था। किडनी निकलवाने के लिए 30 हजार रुपए का लालच दिया जाता था। जो लोग इसका विरोध करते थे उन्हें दवा देकर उनकी इच्छा के विरुद्ध उनकी किडनी निकाल ली जाती थी। अब 16 साल बाद एक बार फिर गुरुग्राम में पकड़े गए इस किडनी रैकेट ने सभी के रोंगटे खड़े कर दिए हैं।
किडनी ट्रांसप्लांट कराने वाले प्रमुख लोग:
- शमीम मेहंदी हसन, उम्र 24 - इसने इस्लाम नरूल को अपनी किडनी दी है।
- हुसैन मो. आजाद, उम्र 30 - इनको मो. सैय्यद अक्स को किडनी देनी थी, जो अभी तक ट्रांसप्लांट नहीं हो पाई है।
- मेहंदी मजूमदार, उम्र 32 ने एमडी हसनुल उम्र 44 को किडनी ट्रांसप्लांट किया है। एमडी हसनुल अभी गेस्टहाउस में मौजूद हैं, जबकि किडनी डोनर जा चुका है।
मुर्तजा अंसारी है सरगना, अभी फरार:
- गिरोह का मास्टर माइंड मोहम्मद मुर्ताज अंसारी है। जो बांग्लादेश के लोगों का ट्रांसप्लांट गुरुग्राम के नाम पर कराता है। उसके द्वारा ट्रांसप्लांट कराने वालों से बातचीत के बाद अन्य ग्राहक बनते हैं। मुख्यमंत्री उड़नदस्ता टीम की कार्रवाई के पहले से ही वह फरार है। पुलिस का कहना है कि आरोपी की तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है।
लीज पर चल रहा था गेस्ट हाउस:
जिस गेस्ट हाउस में आरोपी पकड़े गए उसे रोहित नाम का युवक किराए पर लेकर चलाता था। गेस्ट हाउस मालिक को यह पता ही नहीं था, कि उसके गेस्टहाउस में क्या चल रहा था।
पांच दिन पूर्व जयपुर में भी दर्ज हो चुका है मामला:
किडनी ट्रांसप्लांट से जुड़े इस मामले में राजस्थान एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम भी पूर्व में कार्रवाई कर चुकी है। टीम ने जयुपर स्थित सवाई मान सिंह चिकित्सालय में तैनात क्लर्क गौरव सिंह द्वारा निजी अस्पतालों में अंग प्रत्यारोपण संबंधी चिकित्सा के लिए सवाई मानसिंह चिकित्सालय के डाक्टरों के फर्जी हस्ताक्षर करके एनओसी जारी करता है। इसकी एवज में वह निजी चिकित्सालयों से मोटी रकम लेता है।
मयंक तिवारी