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Gurugram News: नहाय खाय के साथ आज शुरू होगा महापर्व छठ, बाजारों में रौनक

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घीया और चावल का खाकर शुरू करेंगे अनुष्ठान, स्थानीय कलाकार प्रस्तुत करेंगे छठ घाटों पर कार्यक्रम
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शहर में 50 से ज्यादा छोटे बड़े घाट बनाए गए हैं
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। शुक्रवार को नहाय खाय से सूर्योपासना के महापर्व छठ के चार दिवसीय अनुष्ठान की शुरुआत हो जाएगी। वैसे व्रती दिवाली के बाद से ही सात्विक भोजन और जीवन शुरू कर देते हैं। नहाय खाय के दिन पारंपरिक रूप से गंगा या जलाशय में स्नान की परंपरा रही है। इसके बाद सादा चावल, घीये की सादी सब्जी और चने की दाल का सेवन व्रती करेंगे । शनिवार को खरना का व्रत होगा। इसमें पूरे दिन व्रत रखकर शाम की पूजा और हवन के बाद गुड़ की खीर और रोटी ग्रहण करेंगे। यह प्रसाद परिचितों और पड़ोसियों में भी बांटा जाएगा। रविवार को पहला अर्घ्य और सोमवार प्रात:कालीन अर्घ्य के साथ पूजा संपन्न होगी। बाजार में काफी संख्या में लोग घीया खरीदते नजर आए।
गुरुग्राम में छठ को लेकर बाजारों में काफी चहल- पहल है। शहर में 50 से ज्यादा छोटे बड़े घाट बनाए गए हैं। कुछ सोसाइटियों में आस-पास की सोसाइटियों के पूर्वांचलियों के साथ मिलकर छठ मनाएंगे। पाटलीपुत्र सांस्कृतिक चेतना समिति के अध्यक्ष संत कुमार ने बताया कि घाट पर एंबुलेंस, नगर निगम की चलंत टॉयलेट, पानी और सुरक्षा को लेकर प्रशासन ने सहमति दी है। प्रवासी एकता मंच के अध्यक्ष सत्येंद्र सिंह ने बताया कि उन लोगों ने पुलिस आयुक्त से मिलकर छठ घाटों पर सुरक्षा की सहमति ली है। गुरुग्राम, मानेसर, पालम विहार, बसई, धनकोट, चकरपुर, सूरत नगर, सेक्टर 15 पार्ट टू, लेबर चौक, मारुति कुंज के 26 ऐसे बड़े घाटों की सूची दी है, जहां पुलिस की जरूरत है। पुलिस ने इन घाटों पर पर्याप्त पुलिस बल की व्यवस्था की स्वीकारी है। देवी लाल नगर मनकामेश्वर मंदिर में ह्रदया सिंह ने बताया कि मंदिर में कई साल पहले पक्का तालाब बनाया गया था। उसकी सफाई चल रही है। शुक्रवार को उसमें पानी भरने का काम शुरू कर दिया जाएगा।
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छठ पर कोसी पूजन की परंपरा
छठ के मौके पर उन परिवारों को कोसी भरने की परंपरा रही है, जिनके घर साल में कोई शुभ कार्य हुआ हो। कोसी का भरा जाना सुख समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। सजे हुए मिट्टी के हाथी पर मिट्टी का एक बड़ा पात्र उसके चारों ओर जलते दीपक। इस पात्र में अनाज भर कर सभी दीपक जला दिए जाते हैं। कोसी के ऊपर ईख से एक मंदिरनुमा संरचना बना दी जाती है। सांध्य अर्घ्य के बाद कोसी भरी जाती है। रात भर दीपक जलाए रखकर महिलाएं गीत गाती हैं। सुबह के अर्घ्य के बाद कोसी पूजन पूरा हो जाता है। सदर बाजार में कोसी के हाथी, , मिट्टी के दीपक,चौमुख आदि मौजूद हैं। कोसी के हाथी काे रंग भरती कमला बताती हैं कि वे पिछले कई सालों से छठ के लिए जरूरी मिट्टी की चीजें दिल्ली के उत्तम नगर से लेकर आती हैं। छठ में अच्छा लाभ होता है। दीपक, हाथी और कोसी को अच्छी तरह रंग दिया जाए तो कीमतें और अच्छी मिलती है। कमला की तरह कई अन्य दुकानदारों ने भी छठ पूजा की सामग्री की दुकानें सजाई हैं। गुरुग्राम के छठ घाटों पर काफी संख्या में लोग कोसी सजाकर वहां पूजन करते हैं।
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सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रहेगी बहार
सदर बाजार से लेकर पूर्वांचल बाहुल्य वाली कॉलोनियों में छठ के गीत गूंजने लगे हैं मगर छठ घाटों पर कलाकार छठ के गीतों की छटा बिखेरने की तैयारी में हैं। गुरुग्राम के छठ घाटों पर इस भी कलाकार छठ के गीत और भोजपुरी,मगही, मैथिली भक्तिगीतों के कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगे। इस मौके विभिन्न झांकियों की प्रस्तुति भी होगी लोक गायक साथी उमेश की टीम सेक्टर 102 स्थित सनसिटी एवेन्यू, सेक्टर 45 में कन्हई के छठ घाट, ओम विहार और खांडसा के यंग स्टार छठ घाट में कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगे। शीतला माता मंदिर की पार्किंग में बने छठ घाट पर भी सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

इन जगहों पर बन चुके हैं छठ घाट
- शीतला माता मंदिर पार्किंग
- सूरत नगर झोपड़ी वाला शिव मंदिर
- सेक्टर 15 पार्ट -2 सामुदायिक भवन
देवी लाल नगर मनकामेश्वर मंदिर
- सेक्टर 45 कन्हई
- सुशांत लोक -वन सी ब्लॉक
- सेक्टर 3, 5 लेबर चौक
- सेक्टर 5 पानी टंकी
- मौजी वाला कुआं गुड़गांव गांव
- मारुति कुंज, श्याम कुंज
- खांडसा ओम विहार
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